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Posted On 10:48 pm by विनीत कुमार |

जिन मिश्र बंधु की हिंदी साहित्य का इतिहास और मिश्र बंधु विनोद जैसी ऐतिहासिक किताबें पढ़कर हम बड़े हुए, उन्हीं मिश्र बंधु की ये हवेली है.
लाइब्रेरी में अब इनकी किताबें धूल चाटती हैं और हवेली को व्यवस्था के दीमक चाट गए..ऐसे लोगों ने इस हवेली पर ऐसा कब्ज़ा जमाया कि आसपास कोई ये जाननेवाला नहीं कि वो हिंदी साहित्य की दुनिया में क्या मायने रखते हैं.
बाकी उत्तर प्रदेश टूरिस्ट स्पॉट तो है ही.
‪#‎दरबदरलखनऊ‬
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