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दीपक चौरसिया टेलीविजन का जाना-पहचाना और सबसे पॉपुलर चेहरा है। वो इतना पॉपुलर तो जरुर है कि फिल्म पीपली लाइव में उनके आस-पास का एक कैरक्टर गढ़ा जाता है और स्वाभाविक तौर पर उसका भी नाम दीपक रखा जाता है जिसकी ठसक एक-दो बार चैनल हेड से उपर तक की दिखाई जाती है,जिसके उपर मंत्रीजी की विशेष कृपा है। सिनेमा है इसलिए सीधे-सीधे हम असली दीपक चौरसिया से इसे जोड़कर देखें तो बेमानी होगी। लेकिन आज जो अभी हम शो देख रहे हैं उससे ये बात जरुर समझ आ जाती है कि दीपक चौरसिया पर सिस्टम की खास मेहरबानी जरुर है।

"बाइक पर आया जॉन" नाम से एक खास शो आ रहा है जिसमें वो जॉन इब्राहिम के साथ बाइक पर बैठकर इंटरव्यू ले रहे हैं। एक ऑडिएंस के तौर पर हमारी सबसे पहली नजर जिस बात पर जाती है वो ये कि एक तो दोनों में से किसी ने हेमलेट नहीं पहने हैं और दूसरी कि उनकी बाइक के पीछे चलनेवाली गाडियां परेशानी झेल रही है। स्टार न्यूज इतना स्मार्ट चैनल तो जरुर है कि उसे पता है कि इस नजारे को देखते ही ऑडिएंस एकदम से भड़क जाएगी कि जो मीडिया हमें दिन-रात नियमों के पालन की नसीहतें देता रहता है वो खुद सरेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है। इसलिए स्क्रीन के नीचे पीले रंग से मोटे-मोटे अक्षरों में लिखा आता है कि- इस कार्यक्रम के लिए चैनल ने विशेष अनुमति ले रखी है,दर्शकों से अनुरोध है कि बिना हेलमेट बाइक की सवारी न करें। इस लाइन को पढ़ते हुए हमें बस यही मुहावरा याद आता है- सइंया भए कोतवाल, तो अब डर काहे का। जब अनुमति ले ही ली है तो देश का सबसे नामी टेलीविजन चेहरा अगर नियमों को अपनी जेब में रखकर घूमता है तो क्या फर्क पड़ता है? हम दीपक चौरसिया सहित स्टार न्यूज को किसी भी तरह से कानूनी स्तर पर चैलेंज नहीं कर सकते क्योंकि उसने कुछ भी नियम से हटकर नहीं किया है? उनके पास संभवतः सारे लिखित दस्तावेज होंगे जिसमें बिना हेलमेट के काला चश्मा लगाए लौंडे टाइप से जॉन इब्राहिम के साथ बाइम में बैठकर इंटरव्यू ले सकेंगे। हम तो बस उस अधिकारी की डिसीजन लेने की क्षमता और उसकी बुद्धि की बलिहारी पर रो सकते हैं जिसने कि चैनल या दीपक चौरसिया से एक बार भी ये सवाल नहीं किया कि क्या ऐसा करना इतना जरुरी है कि बिना हेलमेट के सड़कों पर मनमाने ढंग से बाइक चलाने,बात करने की अनुमति दी जा सके। मैं लगतार देख रहा हूं उनके इस तरह बातचीत करने से पीछे की गाड़ियां, ट्रैफिक डिस्टर्ब हो रही है। दीपक चौरसिया और स्टार न्यूज उस लिखित अनुमति और हमसे बिना हेलमेट के बाइक की सवारी न करने की नसीहत देकर एक तरह से हमें ठेंगा दिखाने का काम करते हैं। साथ ही ये भी बताने की कोशिश भी कि अगर आपके पास ऐसा करने की इजाजत है तो घंटा कोई कुछ कर सकता है। लेकिन सवाल दूसरा है-

 सवाल ये है कि क्या स्टार न्यूज कोई फिल्म प्रोडक्शन हाउस है या फिर दिखाया जानेवाला शो सिनेमा है कि उन्हें शूटिंग करने के लिए इस तरह की इजाजत दे दी जाए? क्या चैनल ने इसके लिए फिल्मों की शूटिंग इतनी रकम अदा की है,इसे चैनल को साफ करना चाहिए? स्टार न्यूज को कल को ये क्रेडिट भले ही मिल जाए कि वो ऐसा करने का ट्रेंड सेटर है लेकिन ये किस तरह की ट्रेंड होगी इस पर गंभीरता से विचार करने की जरुरत है। इस देश में जितने भी चैनल हैं उनमें से लगभग सबों के पास इतनी हैसियत और आकात है कि वो इस तरह की परमीशन ले सके। अब ऐसा करना बाकी चैनलों ने भी शुरु कर दिया तो फिर आगे कहां जाकर थमेगा? माफ कीजिएगा,मैं किसी भी तरह के कठमुल्लेपन की तरफ नहीं जा रहा लेकिन कल आप जॉन इब्राहिम ही क्यों,बिकनी के साथ विपाशा वसु को बिठाकर इंटरव्यू लें..लेकिन टीआरपी के कुछ टुकड़ों के अलावे आप बाकी क्या देना चाहते हैं,इस पर बात करनी जरुरी है। इस शो में इस रवैये को मैं प्रशासन और ट्रैफिक नियम की धज्जियां उड़ाने का मामला मानता हूं। साथ ही शख्स की हैसियत के हिसाब से नियम बदल जाते हैं,ये भी मामला बनता है।

दूसरी बात ये दोनों शख्स जिस मसले पर बात कर रहे हैं, उसका किसी विपदा या इमरजेंसी से संबंध नहीं है कि मजबूरी में ही सही इसकी इजाजत दे देनी चाहिए। माफ करेंगे मैं किसी भी तरह से सरोकारी पत्रकारिता की बात नहीं कर रहा क्योंकि देखते और लिखते हुए इसकी उम्मीद बहुत पहले से जाती रही है,लेकिन मीडिया के भीतर घटनाओं का जो महत्व है उसका आप क्या करेंगे? फिर तो दिनभर में चार बार ऐसी जरुरत पड़ेगी हरेक चैनल को एक सिलेब्रेटी,एक बाइक और बिना हेलमेट की फुटेज की जरुरत पड़ेगी। अगर प्रशासन उन्हें इस बात की अनुमति नहीं देती तो फिर उसकी तटस्थता कहां तक रह जाती है? स्टार न्यूज को इसकी इजाजत देकर उसने एक बहुत ही बेहुदे परंपरा की नींव रखी है जिसमें कि चैनल और वो बराबर का जिम्मेवार है।

तीसरी बात कि दीपक साहब, आज आपने कानूनी इजाजत ले ली है औऱ नंगे सिर सड़क पर लहरा रहे हैं, हमें ठेंगा दिखाकर आगे बढ़े जा रहे हैं लेकिन ऑडिएंस आपको कानून और नियमों के आइने में देखकर पसंद-नापसंद नहीं करती है बल्कि वो आपको इसलिए पसंद करती है कि आप उनके मसले को संवेदनशील तरीके से उठाते हैं। इसे मैं आपके एक अच्छा इंसान होने के तौर पर नहीं एक अच्छी ब्रांड इमेज के तौर पर लेता हूं जिसे कि आज आपने ध्वस्त कर दिया। आज आपने एक पट्टी चलाकर अपने को एक जिम्मेदार नागरिक घोषित कर दिया लेकिन कभी पीछे पलटकर देखा कि आपके ऐसा करने से कितने लोग फॉलो कर रहे हैं?

फुटेज में हमें दिखाई दिया कि कई लोग बिना हेलमेट के चले आ रहे है? क्या सबों के पास ऐसा करने की परमीशन थी? एक बंदा हेलमेट उतारता है और जॉन इब्राहिम सवाल करते हैं कि आप हेलमेट क्यों उतार रहे हैं?  उनके चेहरे से साफ झलकता है कि इजाजत ले लेने के वाबजूद भी कुछ गलत करने का बोध पैदा हो रहा है। दीपक साहब, हम आपसे गांधी बन जाने की उम्मीद नहीं करते कि दूसरों को नसीहत देने के पहले खुद सुधरो, बच्चे को मीठा खाने से मना करने के पहले खुद खाना बंद करो। ये अलग बात है कि आपने ठीक गांधी जयंती के मौके पर ऐसा किया है। लेकिन इतना तो जरुर कह सकते हैं कि आपको क्या कभी नैतिक अधिकार होगा कि आप लोगों से देश की किसी भी सामाजिक बुराईयों को रोकने के लिए,नियम से चलने की बात कर सकें। मुझे इतना तो पता ही है कि जॉन इब्राहिम फिर भी किसी मैराथन के एंमबेसडर बनेंगे, रेसलाइन में दौड़ेंगे या साइकिल चलाएंगे लेकिन आप?..

दरअसल आप जिस जॉन इब्राहिम की सबसे बेहतर बाइक राइडर की इमेज को भुनाना चाह रहे हैं,उससे आपकी खुद की इमेज न केवल करप्ट हुई है बल्कि एक न्यूज चैनल की साख को बट्टा लगा है। दिनभर नंबर तीन चैनल हो जाने की कुंठा से मुक्त होने की जुगाड़ों के लिए क्या भूत होते हैं से चैनल को तो जूझते देखा ही,प्राइम टाइम में इस तरह का कबाड़ा।..अफसोस होता है,एक पॉलिटिकल कॉरेसपॉडेंट का इस तरह से पतन होते हुए देखकर..

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14 Response to 'दीपक चौरसिया से बड़ा इस देश में कोई नहीं'
  1. अनूप शुक्ल
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/10/blog-post.html?showComment=1286039435997#c6840608435639938015'> 2 अक्तूबर 2010 को 10:40 pm

    सही! बहुत सही सवाल!

    ये टी आर पी के शार्टकट के लटके-झटके हैं। न दीपक चौरसिया को कुछ समझ आया न उनके चैनल को। कल को कोई और आपराधिक घटना दिखायेंगे और कहेंगे हमने उसको अंजाम तक लाने के पहले तक की अनुमति ले रखी है।

    इस तरह की कलाकारी देखकर कभी-कभी तो लगता है भेजा फ़िर गया इन मीडिया वालों का।

    सतर्क, जागरूक, सुन्दर पोस्ट! बहुत अच्छा लगा इस हरकत पर सवाल उठाना!

     

  2. निशांत मिश्र - Nishant Mishra
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/10/blog-post.html?showComment=1286046198453#c5738659188648731713'> 3 अक्तूबर 2010 को 12:33 am

    यार मुझे लग रहा था कि तुम इसपर लिखोगे और तुमने वाकई धाँसू लिख मारा.

     

  3. C-MANTRA
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/10/blog-post.html?showComment=1286076446430#c1447183120261909994'> 3 अक्तूबर 2010 को 8:57 am

    बहुत अच्छा सवाल

     

  4. डॉ. मोनिका शर्मा
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/10/blog-post.html?showComment=1286079364609#c7209393606893891485'> 3 अक्तूबर 2010 को 9:46 am

    apka sawal bhi sahi hai aur vishleshan bhi sateek hai.....

     

  5. miracle5169@gmail.com
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/10/blog-post.html?showComment=1286082385406#c3504854106508085796'> 3 अक्तूबर 2010 को 10:36 am

    bahut khub.jhinjhorte rahiye.

     

  6. Videsh Varta
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/10/blog-post.html?showComment=1286083433349#c5130201223326913900'> 3 अक्तूबर 2010 को 10:53 am

    बहुत सुन्दर लेख है
    वैसे भी हम आपकी लेखनी के प्रशंसक हैं
    Anwarul Haq
    anwarjournalist@gmail.com

     

  7. anjule shyam
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/10/blog-post.html?showComment=1286083604949#c3931827619507864946'> 3 अक्तूबर 2010 को 10:56 am

    उल्लू ही उलू हैं हैं यहाँ ...अब एक दीपक नाम का लालू भी सही..क्या कर सकते हैं केरत खाना है जिसे आना है आजाये...नियम तोडना है तोड़ जाए क्या फर्क पड़ता है...ये इंडिया है मेरी जान....

     

  8. satyam
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/10/blog-post.html?showComment=1286090990503#c3160527074968288037'> 3 अक्तूबर 2010 को 12:59 pm

    बहुत ही सही सवाल उठाया है विनीत आपने।ये सिलसिला कहॉ जाकर थमेगा क्या इसका जवाब है किसी क् पास.................

     

  9. Ranjeet jha
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/10/blog-post.html?showComment=1286102269301#c6348514681524281526'> 3 अक्तूबर 2010 को 4:07 pm

    Desh ke ek pramukh chanel ke reporter sath me ek hero Road Sefty ko thenga dikha rahe hon waha ki sadharan log sefty ko kya manenge.....Dono ki sirf chalan nahi ek saza milni chahiye......Deepak jee, Aap to actor nahi hai phir aapne bhi desh ke kanoon ko thenga dikha diya.

     

  10. amitesh
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/10/blog-post.html?showComment=1286112034558#c1796758390236817955'> 3 अक्तूबर 2010 को 6:50 pm

    why is ths post?

     

  11. डॉ महेश सिन्हा
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/10/blog-post.html?showComment=1286123150121#c1599572327405619791'> 3 अक्तूबर 2010 को 9:55 pm

    आसपास सभी बिना हेलमेट के हैं

     

  12. Sanjeet Tripathi
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/10/blog-post.html?showComment=1286217910892#c3365600082834142666'> 5 अक्तूबर 2010 को 12:15 am

    aaspaas sabhi bahle hi bina helmet k hain lekin uske baad bhi aapki yah lekhni ekdam satik hai, sahi sawal sahi topic....

    isiliye hi vineet, vineet hai. shandar lapeta hai.

     

  13. Krishna Kumar Mishra
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/10/blog-post.html?showComment=1286640389740#c2161600064810779900'> 9 अक्तूबर 2010 को 9:36 pm

    सुन्दर प्रयास!

     

  14. शरद कोकास
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/10/blog-post.html?showComment=1286737561516#c1350177319360641544'> 11 अक्तूबर 2010 को 12:36 am

    बढ़िया लिखा है ।

     

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