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कल हमने आपसे अपील की थी कि मैंने तो स्टार न्यूज के भीतर रावण और चैनल के रावण मानसिकता से ड्राइव होने की बात लिख दी है। आप भी पहल करें,अच्छा रहेगा। ठीक उसी रात मीडिया फोकस साइट मीडियाखबर डॉट कॉम ने एक सीरिज शुरु की- न्यूज चैनलों के नौ रावण और उनलोगों की पूरी एक लिस्ट जारी है जो वाकई अलग-अलग खौपनाक कारनामे से मीडिया इन्डस्ट्री के रावण हैं। लिहाजा हम वहां से वो पोस्ट उधार लेकर आपसे साझा कर रहे हैं। ये बहुत ही मौजूं दौर है,जहां आकर मीडिया जिसे की लोकतंत्र का चौथा स्तंभ और बदलाव का नायक करार देते रहे,उसकी शक्ल एक विलेन के तौर पर बन गयी है। पहले पीपली लाइव और अब नॉक आउट देखकर हम इसे आसानी से समझ सकते हैं।


अगस्त तीस (2007) को दरियागंज के तुर्कमान गेट के इलाके में अचानक बवाल हुआ, तोड़-फोड़ आगजनी हुई और सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुँचाई गयी, आरोपी शिक्षिका उमा खुराना को सजा देने के लिए सच्चरित्र और ईमानदार लोगों की भारी भीड़ जमा हो गयी। आरोपी शिक्षिका के कपड़े फाड़े गए, बाल पकड़ कर घसीटा गया और पूरी कोशिश की गयी कि उसे जज जनता सजा-ए-मौत दे दे। उसे बचाने वाली पुलिस पर भी इन जजों का गुस्सा उतरा, पथराव हुआ और वह जिप्सी जला दी गयी जिसमें अन्य कई केसों की महत्वपूर्ण फाइलें भी थीं जिनको फिर से तैयार करना एक दुष्कर और अत्यंत खर्चीला कार्य होगा।
उमा खुराना पर स्कूल में सेक्स रैकेट चलाने का आरोप लगा. इन सारी घटनाओं का सूत्रधार चैनल ‘लाइव इंडिया’जो कुछ ही दिन पहले इस रूप में आया था तत्काल चर्चित हो गया। न्यूज़ चैनल ‘जनमत’ को न्यूज़ चैनल ‘लाइव इंडिया’ बनाने वाले उसके मालिक ‘मार्कंड अधिकारी' इस बात से खुश थे कि खबरिया चैनलों की भीड़ के बावजूद मात्र 20 दिनों में उन्होंने अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी। जनता सड़कों पर उतर गयी। एक तरह की क्रांति हो गयी। 50 साल पुराने विद्यालय के गेट में रस्सी बांध दी गयी। 1200 छात्राओं में से 80 छात्राओं ने विद्यालय का बहिष्कार कर दिया। तीसरी कक्षा तक की छात्राओं को अभिभावकों ने रोककर उमा खुराना रूपी राक्षसी से उनकी रक्षा कर ली। इस प्रकार लाइव इंडिया ने समाज के बड़े हिस्से को गर्त में गिरने से बचा लिया।

अब तस्वीर का दूसरा पहलू. लाइव इंडिया का यह स्टिंग फर्जी साबित हुआ. इस स्टिंग को करने वाला लाइव इंडिया के रिपोर्टर प्रकाश सिंह का यह फर्जीवाडा था . उमा खुराना के बारे में न्यायाधीश ने कहा कि उमा खुराना अपराधी नहीं अपराधियों की करतूत की शिकार हुई लगती हैं. अब लाइव इंडिया के चैनल हेड सुधीर चौधरी की इजाजत से चले स्टिंग ऑपरेशन की हकीकत सुनिए.
जांच – पड़ताल के बाद पता चला कि लाईव इंडिया के रिपोर्टर ने स्टिंग में जिस छात्रा को दिखाया था, वह नोएडा से निकलनेवाले एक साप्ताहिक समाचारपत्र निर्भीक प्रहरी की संवाददाता थी. पत्रकारिता में तेजी से ऊपर पहुंचने के लिए उसने प्रकाश सिंह के कहने पर यह सब किया. बिहार से दिल्ली पत्रकारिता करने आयी रश्मि सिंह वह लड़की बन गयी जिसे उमा खुराना किसी ग्राहक को सौंप रही हैं. पुलिस की जांच-पड़ताल में ये बात सामने आई कि यह सब एक छोटे व्यापारी वीरेन्द्र अरोड़ा का रचा गया षड़यंत्र था. पूर्वी दिल्ली में चिटफंड का छोटा-मोटा धंधा करनेवाले अरोड़ा ने शिक्षिका को पैसे उधार दिये थे. डेढ़ लाख की वसूली नहीं हो पा रही थी इसलिए उसे बदनाम करवाने के लिए वह स्टिंग करवाना चाहता था. उसने एक दो चैनलों के रिपोर्टरों से इस सिलसिले में बात की. इन्हीं में से एक प्रकाश सिंह था जो ऐसा करने के लिए तैयार हो गया. वह स्टिंग में कुछ ऐसा दिखाना था जिससे यह लगे कि उमा खुराना वैश्यावृत्ति के धंधे में शामिल हैं. कम से कम तीन चैनलों को इस पेशकश की जानकारी थी. प्रकाश सिंह तब आईबीएन-7 में था जब अरोड़ा ने उससे संपर्क किया था. दोनों ने मिलकर तय किया कि वे इस खबर पर काम करेंगे. प्रकाश सिंह भी रातों-रात स्टार पत्रकार बनने की हसरत पाले हुए था. उसने इसी दौरान रश्मि सिंह से भी बात की. और रश्मि सिंह भी अच्छी नौकरी की आस में तैयार हो गयी. इस तरह एक स्टिंग तैयार हो गया और उमा खुराना को पर्दे पर स्कूली छात्राओं से देह व्यापार करनेवाला साबित कर दिया गया।

यह खबर आईबीएन सेवेन के लैब में संपादित हुई. सीडी तैयार थी और पता नहीं क्यों उसे दिखाने से मना कर दिया गया. प्रकाश सिंह को लगा उसका सपना चकनाचूर होने जा रहा है. उसने चैनल छोड़ दिया. कारण शायद कुछ और भी रहे होंगे. लेकिन वह लाईव इंडिया में आ गया. उसको काम करते हुए महीनाभर भी नहीं बीता होगा कि यह खबर सबके सामने आ गयी. स्टिंग के टेप में कहीं वीरेन्द्र अरोड़ा फोन करके लड़की का इंतजाम करने को कह रहे हैं और उमा खुराना “करती हूं” जैसी कोई बात कहते हुए सुनाई पड़ती हैं.
इस फर्जी स्टिंग ऑपरेशन के भंडाफोड के बाद लाइव इंडिया की फजीहत हुई. चैनल पर एक महीने का  बैन लगा. फर्जी स्टिंग करने वाला रिपोर्टर प्रकाश सिंह गिरफ्तार हुआ. चारो तरफ चैनल की थू – थू हुई. लाइव इंडिया के साथ दूसरे समाचार चैनलों की भी थुक्कम – फजीहत हुई. मिला – जुलाकर ऐसा माहौल बन गया कि समाचार चैनलों में सारे ऐसे ही फर्जी स्टिंग ऑपरेशन होते हैं. टीवी न्यूज़ की विश्वसनीयता घेरे में आ गयी. लाइव इंडिया के चैनल हेड सुधीर चौधरी ने कहा कि प्रकाश सिंह ने चैनल को अँधेरे में रखा. एक अंग्रेजी वेबसाइट ने सुधीर चौधरी के इसी बयान को कोट करते हुए लिखा : Now Sudhir Chaudhary is saying that the reporter kept the channel in the dark. He had only recently left India TV to head Live India (formerly Janmat). What about the editorial skills of your editors. Poor Choudhary can't be expected to deliver better, after all, he is graduated from India TV school of journalism.

सुधीर चौधरी का ये बयान थोथी दलील से ज्यादा कुछ नहीं था .यदि सही – गलत कंटेंट के फर्क को समझने की आपकी समझ नहीं है तो फिर एक चैनल का नेतृत्व आप किस मुंह से करते हैं. क्या ऐसी दलील देते सुधीर चौधरी को शर्म नहीं आई. उमा खुराना को झूठे मामले में ही सही गलत सिद्ध किये जाने पर उसके बाल पकड़कर घसीटा गया तो क्या सुधीर चौधरी को भी बाल पकड़ कर क्यों नहीं घसीटा जाना चाहिए?ऐसे व्यक्ति और चैनल को हम रावण न कहे तो क्या कहें?
कहने को सुधीर चौधरी का पत्रकारिता में 15 से ज्यादा वर्षों का अनुभव है. लाइव इंडिया से पहले जी न्यूज़, सहारा और इंडिया टीवी में काम का अनुभव है. लेकिन यह अनुभव किस काम का? टीवी पत्रकारिता का सबसे काला अध्याय सुधीर चौधरी के कंधे पर चढ़कर प्रकाश कुमार ने लिखा. अफ़सोस की बात है कि पत्रकारिता के तीनों रावण आज भी जिंदा हैं. लाइव इंडिया चल रहा है और उसी सुधीर चौधरी के नेतृत्व में चल रहा है. फर्जी स्टिंग ऑपरेशन को अंजाम देने वाला प्रकाश सिंह न्यूज़ इंडस्ट्री में अब भी काम कर रहा है. (अब नयी खबर आई है कि किसी केन्द्रीय नेता का वह मीडिया कॉर्डिनेटर बन गया है.). सबसे अफसोसजनक बात तो ये है कि सुधीर चौधरी उस एनबीए के सदस्य हैं जो न्यूज़ चैनलों के कंटेंट की निगरानी रखती है. मतलब साफ़ है कि अपने अविवेक और टीआरपी की ललक में ऐसी पीत पत्रकारिता करने के बावजूद उमा खुराना का यह रावण न केवल जिंदा है बल्कि अपने जड़े भी तेजी से मजबूत कर रहा है. क्या किसी दशहरे इस रावण का भी दहन होगा ? (स्रोत – मीडिया मंत्र, प्रथम प्रवक्ता,नवभारत टाइम्स,NDTV24X7)                        


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2 Response to 'लाइव इंडिया का रावण चैनल हेड सुधीर चौधरी'
  1. काजल कुमार Kajal Kumar
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/10/blog-post_4889.html?showComment=1287492779497#c3012296280737261996'> 19 अक्तूबर 2010 को 6:22 pm

    वाह सलीके से क्लास हो रही है चैनलों की.

     

  2. अनूप शुक्ल
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/10/blog-post_4889.html?showComment=1342574236910#c1520181408964312375'> 18 जुलाई 2012 को 6:47 am

    अफ़सोस! अब तो हर चैनल की सनसनी न्यूज पर संदेह होने लगा है। चौधरी जैसे लोग इस माध्यम को और बदनाम कर रहे हैं।

     

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