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करवा चौथ के नाम पर एकाध हिन्दी चैनलों को छोड़कर बाकियों ने जमकर गंध मचाये। चूंकि ऐसे मौके के लिए आजतक और इंडिया टीवी को महारथ हासिल है इसलिए उन पर इस त्यौहार का रंग कुछ ज्यादा ही गाढ़े तौर पर चढ़ा। टेलीविजन पर से ऐतिहासिक तथ्य तो गायब हो ही गए हैं,मौके की खासियत भी खत्म हो गयी है। जहां लिखा है प्यार,वहां लिख दो सड़क की तर्ज पर पूरी टेलीविजन इन्डस्ट्री बदहवाश काम किए जा रही है। ऐसे में पूरी कोशिशें इस बात की है कि कौन कितने ज्यादा वॉल्यूम में गंध मचा सकता है। कीचड़ में लीथ-लीथकर लोटने की आदत कोई मजबूरी नहीं बलिक शौक का हिस्सा बन गया है। लिहाजा करवा चौथ की कवरेज पर एक नजर

 आजतक की दो एंकर सोलह सिंगार के अंदाज में स्क्रीन पर काबिज हुई और उसी अंदाज में एंकरिग किया। किस रंग के रत्न,जेवर पहनने से और कब पहनने से इस व्रत का सही आउटपुट मिलेगा,इसके लिए पेड पंडित को स्टूडियो में हायर किया। फिर एक के बाद एक पैकेज।
मसलन टेलीविजन की हस्तियों का करवाचौथ,बॉलीवुड की पत्नियों का करवाचौथ। फिर लगातार अपील आजतक छोड़कर कहीं मत जाइए,आपको चांद देखने के लिए बालकनी या छत पर नहीं जाना होगा,हम यहीं बताएंगे कि चांद निकला या नहीं,बस देखते रहिए आजतक। ऑडिएंस को अपने पर कितना भरोसा है,नहीं पता लेकिन चैनल को अपने उपर भरोसा रत्तीभर भी नहीं,इसलिए लगा कि इतनी मनुहार के बाद भी कहीं वो छिटक न जाए तो सीधे ऑफर किया- आजतक देखो,सोना जीतो।

कोई हिन्दी चैनल लाख कोशिशें कर लें,गंध मचाने के मामले में मैं इंडिया टीवी को सबका बाप मानता हूं। उसके आगे अब आजतक भी पायरेसी लगती है और आइबीएन7 इन दोनों चैनलों की कॉकटेल। इसलिए अगर आपको हिन्दी न्यूज चैनलों की गंध मचाई का मौलिक वर्जन देखना हो तो इंडिया टीवी के आगे कोई विकल्प नहीं।    इंडिया टीवी ने करवा चौथ को ईद के बराबर में लाकर खड़ा कर दिया। एक ही साथ स्क्रीन पर दस शहरों में कब,कहां चाद निकलेगा इसकी जानकारी देने में जुट गया और फिर शार्टकट में ही सही सभी जगहों का नजारा। पेड पंडित यहां भी बताने लग गए कि बस तीन मिनट बाकी है लखनउ में चांद निकलने में जबकि दिल्ली के लोग देख सकते हैं अभी चांद। इसके बाद वो सीधे खाने पर उतर गया।

किस राशि की महिला कौन सा आइटम खाकर अपना व्रत तोड़ेगी तो उसके दाम्पत्य जीवन के लिए बेहतर होगा और फिर एक-एक राशियों के हिसाब से उसकी चर्चा। ये अब एक कॉमन फार्मूला हो गया है खासकर इंडिया टीवी और आजतक के लिए कि चाहे सूर्यग्रहण हो,चाहे कोई व्रत हो सभी राशियों को लेकर एक पैकेज बना दो,पेड पंडित को बिठा लो। राशियों पर आधारित कार्यक्रमों की टीआरपी अच्छी होती है। एक सेलबुल एलीमेंट हैं।

अबकी बार टीआरपी के मैदान में सहारा ने न्यूज24 की कनपटी गरम कर दी है और उसे धकियाकर उसके आगे काबिज हो गया है। लिहाजा चैनल के भीतर कुछ अलग और डिफरेंट करने की जबरदस्त बेचैनी है जो कि चैनल के एंकरों सहित पैकेज में साफ तौर पर दिखाई देता है। लेकिन चैनल के भीतर एक भी दमदार प्रोड्यूसर नहीं है,इस सच को टेलीविजन देख रही ऑडिएंस भी बेहतर तरीके से समझती है। कायदे के एक-एक करके खिसक गए आजतक रिटर्न प्रोड्यूसर की कमी पैकेज को एक बेउडे मटीरियल की शक्ल में बदल देती है। वो आपको दिख जाएगा।..तो इसी डिफरेंट दिखने की बेचैनी ने उसे आज की सावित्री खोजने पर विवश किया। उसने स्पेशल पैकेज के तौर पर हॉस्पीटल की बेड पर पड़ी एक ऐसी महिला की स्टोरी दिखायी जो कि अपने पति के खराब लीवर की जानकारी के बाद अपने लीवर का पचास फीसदी हिस्सा देकर उसकी जान बचाती है। जाहिर तौर पर ये अच्छी और मानवीयता की बात है। ये मध्यवर्ग के बीच की गाथा है। लेकिन चैनल इस पैकेज को संभाल नहीं पाता है। डॉक्टर की बाइट और लगातार हॉस्पीटल के फुटेज, करवाचौथ के लाल और चटकीले रंगों के बीच सफेद,लाइट ब्लू रंग मनहुसियत पैदा करते हैं। नतीजा,लिजलिजे पैकेज और इस मनहूसियत से मन उखड़ जाता है जिसका फायदा सीधे तौर पर इंडिया टीवी उठाता है उसी स्टोरी को ज्यादा रोचक तरीके से पेश करता है। हां,सिेनेमा ने कैसे इस करवाचौथ को एक नेशन कल्चरल व्रत बनाया,करवाचौथ के एक दिन पहले की स्टोरी ज्यादा बेहतर और देखने लायक थी।

स्टार न्यूज पर बिहार चुनाव का सुरुर अभी भी सवार है लेकिन करवा चौथ भला उसके इस सुरुर से रुक तो नहीं जाएगा। लिहाजा वहां भी पैकेज चले। कुछ ऐतिहासिक तथ्यों तो कुछ फिल्मी हस्तियों की कहानी को जोड़ते हुए। लेकिन आजतक का मूवी मसाला इस मामले में बाजी मार गया। दीपिका कैसे अपने फिल्म प्रोमोशन-खेले हम जी जान से के लिए इस व्रत को भुनाती है,ढंग से बताया। मल्लिका को कैसे करवाचौथ के नाम पर सुरसुरी छूट जाती है और मातमी शक्ल में नजर आने लगती है,आजतक की इस खोजी पत्रकारिता( हंसिए मत प्लीज) के स्टार न्यूज फीका पड़ गया। हां,उसकी बॉल सबसे बेहतरीन और कलात्मक लगी

देशभर में जहां-जहां भी महिलाओं ने करवा चौथ मनाएं और मेंहदी से शुरु होनेवाले सोलह सिंगार किए,उनमें से एक भी सांवली या काली त्वचा वाली महिला ने या तो मेंहदी नहीं लगाए या फिर व्रत नहीं किया। न्यूज चैनलों की करवा चौथ कवरेज से मेरी तो यही समझ बनी। ये त्योहार सिर्फ गोरी महिलाओं के लिए है और गोरी कलाइयों पर ही मेंहदी का रंग चढ़ सकता है। पूरे टेलीविजन में मुझे सिर्फ नकुषा( लागी तुझसे लगन) ही ऐसी लड़की नजर आती है जिसे कि काली और कुरुप होते हुए भी सिंगार करने का अधिकार है,मेंहदी रचा सकती है।

करवाचौथ का एक एक्सटेंशन वेलेंटाइन डे के तौर पर ही हुआ है और संभव है कि आनेवाले समय में ये आइडिय लव फॉर लाइव डे के तौर पर इमर्ज कर जाए। इसलिए एक मजबूत स्टोरी बनती है जिसे कि चैनलों ने दिखाया कि कैसे अब पति भी अपनी पत्नी के लिए ये व्रत करते हैं और चैनलों ने उन पतियों को उस दिन का हीरो बना दिया जो कि पत्नी के साथ व्रत रखे हैं। दूसरा कि अब सिर्फ अच्छा पति के लिए नहीं,अच्छा पति मिलने की कामना के लिए भी व्रत रखा जाता है। चैनल इस कॉन्सेप्ट को विस्तार देते हैं और इस पर भी जमकर स्टोरी चली और जोड़े विदाउट मैरिज खोजे गए।

इस करवाचौथ में देशभर की महिलाओं ने सोलह सिंगार किए,लंहगें और चटकीले रंगों की साडियां पहनी। फैशन की मार में काले रंग की भी साडियों पहनी,अपशगुन का कोई लोचा नहीं रहा। धोनी ने भी पहली बार व्रत कर रही  अपनी पत्नी साक्षी के लिए सूरत से खासतौर पर साडियां खरीदीं लेकिन चैनलों ने उसे साड़ी या जोड़े में दिखाने के बजाय दो दिन पहले की गोवा बीच वाली अधनंगी दिखती फुटेज ही दिखाए। चैनल की कुंठा के आगे साक्षी करवा चौथ में भी सोलह सिंगार नहीं कर सकी,धोनी की लायी हुई साड़ी नहीं पहन सकी। इसका अफसोस है।
इस पूरे प्रकरण में मुझे अमिताभ बच्चन के घर के आगे ब्लू टीशर्ट पहनी आजतक की रिपोर्टर बहुत ही लाचार नजर आयी,उस पर तरस आया। देशभर की लड़कियां,महिलाएं उस्तवी माहौल में रंगी है,वो बाइट न मिल पाने की स्थिति में लाचार और पुअर बाइट बेगर के तौर पर दिखाई देती है। तमाम चैनलों पर एंकर को जिस अंदाज में पेश किया गया,उनके चेहरे पर प्रोफेशन के अलावे निजी जिंदगी की कामना( फ्राइड की भाषा में लिबिडो), ललचायी इरादे ंसाफ तौर पर झलक गए। कई व्ऑइस ओवर को सुनकर महसूस किया कि वो मानो कह रही हो- क्या हर लड़की की जिंदगी त्योहारों के लिए बस आवाज देने के लिए है,उसकी अपनी आवाज नहीं है।

चैनल की इस पूरी चिरकुटई को मीडिया आधारित साइट मीडियाखबर ने बेहतर तरीके से पकड़ा और कल्पना किया कि अगर चैनल के मालिक और बड़े पत्रकार नए फैशन के हिसाब से करवाचौथ करेंगे तो वो अपनी चंदा को देखकर क्या मांगेंगे,लिहाजा- रजत शर्मा का करवाचौथ।.
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4 Response to 'गंध मचाने की जीवंत कथा उर्फ रजत शर्मा का करवाचौथ'
  1. Anand Rathore
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/10/blog-post_7166.html?showComment=1288258088319#c6354608024538311050'> 28 अक्तूबर 2010 को 2:58 pm

    sirji ... sirji.. kahe inko dekhte hain... dimaag dahi ho jaayega..kaash ye blog post aam janta tak pahunchti... ye media ke ustaadon ke karname hain...

    meri gujarish hai ki mere blog par ek post zarur padhe , main kisi se aagrah nahi karta lekin aap se kar raha hoon..

    premchand kaun hai uska biodata laao..

    http://akelahisahi.blogspot.com/

     

  2. Anand Rathore
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/10/blog-post_7166.html?showComment=1288266335308#c6264846481084900607'> 28 अक्तूबर 2010 को 5:15 pm

    विनोद दुआ लाइव का ये एप‍िसोड तो देख ही लीजिए.. mohalla live par hai... vahan mera comment bhi padh lijiye ... aapki bebaki achchi lagti hai isliye kah raha hoon...

     

  3. भारतीय नागरिक - Indian Citizen
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/10/blog-post_7166.html?showComment=1288283176967#c4419926944680936113'> 28 अक्तूबर 2010 को 9:56 pm

    कुछ तो घोर बकवास चैनल हैं... इनमें होड़ रहती है कि कौन सबसे ज्यादा गंधा सकता है..

     

  4. रंजन
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/10/blog-post_7166.html?showComment=1288373685248#c7677748422783718619'> 29 अक्तूबर 2010 को 11:04 pm

    २ टके के चेनलों पर कितने शब्द बर्बाद कर दिए..

     

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