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जब मेनका के कूलीग शाप देते हैं

Posted On 11:53 pm by विनीत कुमार |

इन दिनों हमारा हॉस्टल दो धड़ों में बंट चुका है- एक कुत्ता प्रेमी और दूसरा कुत्तों का दुश्मन। जो लोग कुत्ता प्रेमी हैं उन्हें माना जा रहा है कि वो मेनका के कूलीग हैं और कोई बड़ा प्रोजेक्ट मिल गया है नहीं तो जो देखने से ही जल्लाद लगता है, उसमें गांधी कहां से बस जाएंगे। मेस-टेबल पर चिकन की हड्डियां जैसे चूसता है, कोई भी देखकर बता देगा कि- बंदा किसी जमाने में जरुर राक्षस रहा होगा। इधर जिन्हें कुत्तों से नफरत है, उनके बारे में खुली टिप्पणी की जा रही है कि भाई साहब देह तो धारण कर लिए हैं मनुष्य का लेकिन बाकी हैं सचमुच के राक्षस। बताइए, इस निरीह जीव को मारने से उन्हें क्या मिल जाएगा।...हॉस्टल मिल गया नहीं तो ये भी कुत्ते की तरह, इससे भी बदतर इधर-उधर भटकते फिरते तब समझ में आता।
कहानी यों है कि हमारे हॉस्टल में पता नहीं दो कुत्ते कहां से घुस आए। शुरु में किसी ने नोटिस नहीं ली। दोनों कुत्ते भी नई जगह के कारण सहमे-सहमे से रहते। लोकिन दो-चार दिन हो जाने पर उनमें भी कॉन्फीडेंस आ गया। वो भौंकने लगे, आपस में खेलने लगे और तो और इधर कोई बंदा कमरे पर आयी अपनी दोस्त के लिए खाना ले जाए तो भौंकने लगे. गर्माहट वहीं से शुरु हुई कि- स्साले, कमरे पर खाना ले जाने से वार्डन तो कुछ कहता ही नहीं है, ऑथिरिटी कुछ करती ही नहीं है और ये दो कौड़ी का कुत्ता हम पर भौंक रहा है।... और थाली रखकर वहीं पर दिया एक चप्पल। पहली बार हमने महसूस किया कि ये कुत्ता वाकई में लोगों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।
दूसरे कुत्ते की हालत बहुत अच्छी नहीं है, बीमार-बीमार सा रहता है। आप उसे कितना भी भगाइए, नहीं भागेगा। अब लोगों को गुस्सा इस बात पर आ रहा है कि- ये भगाने पर भी नहीं भागता।
एक भाई साहब ने अपने कमरे की नयी मैट दे दी है, बैठने के लिए। उस पर वो आराम से पड़ा रहता है। हमारे-आपके भगाने और डांटने की चिंता नहीं करता।
परसों मैंने देखा कि वो पेस्ट्री खा रहा है और पड़ोसी की आयी गर्लफ्रैंड उसे पुचकार रही है। अल्ले,ले, मेरा बेबी, मेरा डॉगी। अपने दोस्त को बता रही थी- हाउ स्वीट। तुम्हारे हॉस्टल के लोग इसे मारते क्यों हैं, कितना प्यारा है। एक भाई साहब जो कुत्ते को लेकर अभी तक तय नहीं कर पा रहे थे कि क्या करें, ये सीन देखकर एकदम से बिफर गए- वाह रे पशु प्रेम। यहां लड़के दिन-दिनभर फांका में काट रहे हैं और मैडम को कुत्ते पर प्यार आ रहा है,पक फ्लावर का असर है भाई। खुन्नस खा गए और साइड में आकर गोला बनाना शुरु कर दिया- अरे सीवान भाई, इस कुत्ते का जल्द ही कुछ करना होगा, नहीं तो हमलोगों का.....।
उधर से बिंदास मेरा जूनियर साथी निकला और तपाक से पड़ोसी को बोला- क्या सर भाभीजी मॉडल टाउन से लेकर आई है।..पड़ोसी आंखे तरेरते हुए कोई भद्दी-सी गाली निकालता, इसके पहले ही ध्यान आ गया कि गर्लफ्रैंड आयी हुई है,गलत इंप्रेशन जाएगा। कुछ बोला नहीं। सटाक से अपनी दोस्त को अंदर बुलकर दरवाजा बंद कर लिया। साथी का इतने से मन भरा नहीं था। उसने दरवाजा नॉक किया औऱ कहा- सॉरी सर, आप बुरा मान गए। मैं तो पूछ रहा था कि- कुत्ता जो पेस्ट्री खा रहा था, भाभीजी मॉडल टाउन से लायी थी, बहुत अच्छा होता है। मैंने तो सोचा कि बची होगी तो कुछ जूनियर पर रहम हो जाता, आप तो समझ गए कि मैं कह रहा हूं कि इस कुत्ते को मॉडल टाउन से लायी है। है सम्भव, आप ही बताइए।
चप्पल से मार खाया कुत्ता वाटर कूलर के नीचे दुबककर बैठ गया था। मैंने जैसे ही टैप दबाया- भों-भों करने लगा और इस चक्कर में दो लीटर की भरी बोतल मेरे हाथ से रगड़ खाते हुए गिर गयी। देखा उंगली से तेज खून बह रहा है। संभलते हुए कमरे की तरफ बढ़ा तो गॉशिप शुरु हो गई है । लोग शुरु हो गए हैं कि-ये चुटकुनमा कौन सी शिक्षा दिया है अपनी गर्लफ्रैंड से कि उसको छोड़कर कुत्ते से....ससुरे में दम ही नहीं है। और फिर ठहाके। ऐसे मौके पर लोगों को मसखरई करने में देर नहीं लगती और देखते ही देखते हॉस्टल फ्लैंग भसोड़ी मंच में तब्दील हो जाता है।
मेरी उंगली से अभी भी खून बह रहा था। एक की नजर पड़ गयी और ठहाके लगाते हुए कहा- क्या विनीतजी, आपको भी कुत्ते ने काट लिया क्या, आप तो लिटरेटर के आदमी है, पशु प्रिय व्यक्ति होगें। बताइए न, कैसे कटा.
पूरी बात बताने के बाद कुत्ते के विरोध में प्वाइंट और मजबूत हो गया कि- यही हाल रहा तो कोई सीढ़ी से फिसल कर मर जाएगा। वो खुश भी हो रहे थे कि कुत्ता विरोधी दस्ते में एक और बंदा शामिल हो गया। मुझे गुस्सा तो कुत्ते पर आ ही रहा था, लेकिन जिस तरह बाकी लोग दौड़ा-दौड़ाकर मारते हैं, मेरे से नहीं हो पाता।
सारा मामला रफा-दफा हो गया। लेकिन दो-तीन कहानियां बन गयी-
रुम पर खाना ले जाने से कुत्ते भौंकते हैं। जरुर वार्डन ने छोड़ रखा है हमलोगों के लिए। उनको भी औकात में लाना पड़ेगा।
चुटकुनमा अपनी गर्लफ्रैंड के साथ दिन काट रहा है, उससे कुछ होता हवाता नहीं है। कुत्ते को भगाओ ताकि भाभाजी का ध्यान हम सब पर जाए।
विनीतजी कमजोर आदमी हैं ,उन पर मरियल कुत्ता भौंकता है। अच्छा हुआ पता चल गया। अब देखिए इलेकसन में क्या होता है इनका। होली में बहुत पैरॉडी बनाए थे हमलोगों पर।
..अभी एक घंटे भी नहीं हुए होगें. कमरे में पढ़ रहा था कि पता चला कि अमित सर के कमरे में कुत्ते ने सू सू कर दिया है। लोगों ने कहना शुरु कर दिया कि अब तो कुत्ते की मौत आयी समझो। अमितजी से पंगा लिया है।
अमित सर बहुत मजबूत आदमी हैं। खूब खाते हैं, खूब जिम करते हैं, खूब पढ़ते हैं औऱ मौका होने पर खूब मारते हैं. बीच-बीच में उनका मारने का बहुत मन होता है। नहीं कुछ इश्यू बना जिसमें कि मारा जाए तो किसी की सेल्फ तोड़ देगें, किसी का कूलर और फिर कितने का है, पूछकर पैसे दे देंगे।
उन्हें जैसे ही पता चला कि कुत्ते ने उनके यहां सू सू कर दिया है, बहुत खुश हुए और निकाली रड और शुरु हो गए। कुत्ते के दुश्मन उनका हौसला आफजायी कर रहे थे और कुत्ता प्रेमी, शाप दे रहे थे-इस आदमी को नरक में भी जगह नहीं मिलेगी,बेजान को सता रहा है। तभी पीछे से किसी ने मुझे झकझोरते हुए कहा- महाराज, लगता नहीं कि आप लिटरेटर के स्टूडेंट हैं, कुत्ता मार खा रहा है और आप कुछ कर नहीं रहे। जेएनयू में तो इतने में जीबीएम बैठ जाती।.. मैं कुत्तों से जुड़ी पुरानी यादों में खो गया था। पढिए अगली किस्त में-
मत भौंको मुझ पर अभी तो एम.फिल् भी नहीं हुई है।.....
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6 Response to 'जब मेनका के कूलीग शाप देते हैं'
  1. भुवनेश शर्मा
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/04/blog-post_22.html?showComment=1208849520000#c4860184488483245984'> 22 अप्रैल 2008 को 1:02 pm

    आप भी शामिल हो जाईये इस कुत्‍ता भगाओ भाभी पटाओ अभियान में.
    :)

     

  2. अनिल रघुराज
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/04/blog-post_22.html?showComment=1208862840000#c7268435796217990291'> 22 अप्रैल 2008 को 4:44 pm

    विनीत जी, कुत्तों का संसर्ग बड़ा घातक होता है शारीरिक ही नहीं, मानसिक स्तर पर भी। संभल कर रहिएगा और जांच-परख करते रहिएगा। :)

     

  3. Udan Tashtari
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/04/blog-post_22.html?showComment=1208873460000#c3973703075570051138'> 22 अप्रैल 2008 को 7:41 pm

    :) क्या कहें. अनिल भाई तो सार निचोड़ रख गये हैं.

     

  4. अतुल
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/04/blog-post_22.html?showComment=1208885280000#c1034673160158832096'> 22 अप्रैल 2008 को 10:58 pm

    सही. काटत चाटत स्वान के दूहुं भांति विपरीत.

     

  5. अनूप शुक्ल
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/04/blog-post_22.html?showComment=1208912700000#c7705634044216024117'> 23 अप्रैल 2008 को 6:35 am

    मजेदार लिखा है!

     

  6. राकेश
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/04/blog-post_22.html?showComment=1208921580000#c7184996773481592221'> 23 अप्रैल 2008 को 9:03 am

    मुन्ना किस ओर हैं बंधु ...

     

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