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मेरी बीमारी का इलाज शादी है ?

Posted On 5:26 am by विनीत कुमार |

सारे शादीशुदा ब्लॉगरों लेडिज और जेन्ट्स दोनों से राय मांग रहा हूं, इमानदारी से बताइएगा। मुझे नहीं लगता कि आप भी मेरे साथ छल करेंगे जैसा कि मेरे घरवालों ने करना शुरु कर दिया है।
मैं अक्सर बीमार तो नहीं रहता लेकिन होता रहता हूं। चार दिनों के बाद बीमारी से उठा हूं। बीमारी भी कोई खास नहीं ज्यादातर इन्फेक्शनल डीजिजेज। एलर्जी वाली बीमारी, धूल से, असमय जागने और खाने से। दिल्ली में कोई अपना है भी नहीं कि जिसके यहां जाकर आराम से जाकर रहा जाए। क्योंकि इस मामले में मेरा मानना है कि आधी बीमारी तोघर के खाने से हो जाती है। ले देकर एक किलकारी का घर है जिसके यहां जाने से खाने और किलकारी के साथ खेलने का भी मौका मिल जाता है लेकिन वो भी तो दिनभर क्रैश में रहती है।
बीमारी में दिनभर पड़े-पड़े थक- हारकर घर ही फोन मिला लेता हूं। पहले तो मेरी आवाज बदली-बदली होने पर मां की चिंता बढ़ जाती है। डॉ से दस गुना ज्यादा सलाह और दुनिया भर की हाय-हाय। बस चले तो कभी भी ट्रेन पकड़कर दिल्ली आ जाए। एक ही लाइन की रट कि जरुर खाने-पीने में दिक्कत होती होगी।
भाभी से बात होती है तो मजे लेने लगती है कि इस उम्र में ऐसा ही होता है भाई साहब, कभी भूख नहीं लगती है तो कभी कमजोरी सताती है, कभी लगेगा खूब सोएं और कभी तो रात-रात भर नींद ही नहीं आती। और जब मैं बताता कि ऐसा ही होता तो कहने लगती-बस, समझ गए...क्या हो रहा है आपको।
पापा को हमेशा भय सताए रहता है, एक बार पूछ भी बैठे कि- दिल्ली में कोई लड़की ध्यान में है। अपने से करोगो या फिर हमलोगों की मर्जी से। मैं तो समझ ही नहीं पाया कि क्या बोल रहे हैं। दीदी ने भी कहना शुरु कर दिया है कि आज नहीं तो कल, करना तो पड़ेगा ही। घरवालों के हिसाब से मेरी बीमारी का एक ही इलाज है कि आज नहीं तो कल करना ही पड़ेगा कर लो। घर का खाना मिलेगा तो दुरुस्त रहोगे।
मेरे मामा और कजिन लोग यही बोलकर कि खाने-पीने में दिक्कत होती है, बोलकर कर ली लेकिन मामा को तो सर्दी-खांसी अब भी होती है और कजिन लोग को भी तो कभी पीठ में दर्द तो कभी एलर्जी।
मैं आपलोगों से सिर्फ ये ही जानना चाहता हूं कि मुझे जो अक्सर सर्दी, सिरदर्द, एलर्जी हो जाती है उसका क्या एकमात्र इलाज कर लेनी है, और कोई दूसरा कोई उपाय नहीं है और दूसरा ये कि क्या शादी कर लेने से मुझे कोई बीमारी नहीं होती। मजाक मत करिएगा, जबाब दीजिए, मैं तो सुन-सुनकर इरिटेट हो गया हूं कि॥कर लो आज नहीं तो कल तो करनी ही है।
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19 Response to 'मेरी बीमारी का इलाज शादी है ?'
  1. आशीष
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_26.html?showComment=1204029360000#c7382972383477490428'> 26 फ़रवरी 2008 को 6:06 pm

    बॉस भगवान आपका भला करे

     

  2. Sanjeet Tripathi
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_26.html?showComment=1204029480000#c8822205517120211724'> 26 फ़रवरी 2008 को 6:08 pm

    सही बॉस!!
    साला अपन भी यई सब झेल रहा है, जिधर जाओ जिसे देखो वही यह पहले पूछता है, मिठाई कब खिला रहे हो, बरात कब ले जा रहे हो।
    ऐसा कोई दिन नई जाता जब चार लोग टोक न दें शादी के लिए!!

     

  3. masijeevi
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_26.html?showComment=1204030980000#c8603078361142382613'> 26 फ़रवरी 2008 को 6:33 pm

    कोई मजाक नहीं, इतने गंभीर मसले पर मैं मजाक करता भी नहीं हूँ। जब तक संभव हो विवाह से बचो। परिवार संस्‍था में एकदम अंगदी आस्‍था हो तभी इस परीक्षा को देना। हमारी सलाह अब तक किसी ने नहीं मानी है देखते हैं आप क्‍या करते हैं।

     

  4. पद्मनाभ मिश्र
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_26.html?showComment=1204031580000#c571959845288298424'> 26 फ़रवरी 2008 को 6:43 pm

    मैं आपको दो जानकारी देना चाहता हूँ पहली तो ये कि मैं शादी शुदा हूँ (चार साल पहले गलती हुई थी जब मैं भी बीमार पड़ा था) और दूसरी कि मै मासिजीवी के बात से सहमति रखता हूँ. वरना चार साल बात मेरी इसी टिप्पणी को आप किसी और के चिट्ठे पर कापी पेस्ट कर रहे होँगे.

    पद्मनाभ मिश्र

     

  5. yunus
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_26.html?showComment=1204031640000#c1601332909720076268'> 26 फ़रवरी 2008 को 6:44 pm

    मसिजीवी ठीक कहते हैं । बचे रहे भाई

     

  6. मुनादीवाला
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_26.html?showComment=1204033620000#c4290617278065612369'> 26 फ़रवरी 2008 को 7:17 pm

    आपका नया खुलाचिट्ठा कोई मेंबरशिप नहीं
    यहॉं सब एकदम खुला...भड़ास क्‍या जो चाहे निकालो। कोई मेंबर ऊंबर नहीं बनना कोई झंझट नहीं। अरे कोई पार्टी खोले हैं कि एमपी बनना है। चैनलहू नहीं खोलना। तो काहे मेंबरशिप। जो यार लिखना चाहे सीधे khulachittha.post@blogger.com पर मेल करदे। पोस्‍ट सीधे अपने आप छप जाएगी, हमारे पास नहीं आएगी सीधे ब्‍लॉग पर जाएगी। डायरेक्‍ट आपही मालिक हर लिखे के, कोई झंझट नहीं कोई गिनती नहीं कि आज इतने हो गए आज उतने। तो फिकर काहे की, हो जाओ शुरू।
    http://khulachittha.blogspot.com/

     

  7. मोहिन्दर कुमार
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_26.html?showComment=1204033800000#c6342112981391155088'> 26 फ़रवरी 2008 को 7:20 pm

    भई बीबी कोई टानिक या दवाई तो है नहीं जो आपकी बिमारी ठीक कर देगी.. और जहां तक घर का खाना खाने का सवाल है वो तो बीबी की तबीयत पर निर्भर करता है.. हो सकता है उसका भी बनाना पडे या उसे भी बाहर ले जा कर खिलाना पडे...सोच समझ कर ही कोई कदम उठाना... सलाह के सहारे मत रहना... यह मेरी सलाह है :)

     

  8. anitakumar
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_26.html?showComment=1204036260000#c3410477443972728387'> 26 फ़रवरी 2008 को 8:01 pm

    आप तो ऐसा किजिए कि सब सलाहों का औसत निकाल लिजिएगा,शायद कुछ अढ़ाई जवाब आयेगा तो फ़िर कर भी लिजिएगा और मत भी करिएगा, एक काम करिए, पहले सिर्फ़ सगाई कर के देख लिजिए, वो कहते हैं न प्रोबेशन, ट्रायल बेसिस, फ़िर अगर तबियत ठीक लगे और डॉक्टर आप के घर के चक्कर लगाने लगे कि साहब कहां गायब हो गये तो परमानेंट होने के बारे में सोचिएगा…क्या ख्याल है?
    वैसे मोनिंदर जी की सलाह काबिले गौर है

     

  9. Udan Tashtari
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_26.html?showComment=1204037820000#c8144609189306944035'> 26 फ़रवरी 2008 को 8:27 pm

    इतने सारे विद्वान सलाह दे रहे हैं तो अब हम क्या कहें भाई. इन सबके सामने हमारा कहना क्या मायने रखेगा. जो मन आये सो करो.

     

  10. mamta
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_26.html?showComment=1204044180000#c7776670443463316722'> 26 फ़रवरी 2008 को 10:13 pm

    भाई शादी तो वो लड्डू है जो खाए वो भी पछताए और जो ना खाए वो भी पछताए। तो हमारे ख़्याल से लड्डू खाकर ही पछताना बेहतर है। :)

     

  11. मनीषा पांडेय
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_26.html?showComment=1204044600000#c2261204244652352472'> 26 फ़रवरी 2008 को 10:20 pm

    क्‍या भाई मसिजीवी और यूनुस, खुद तो लड्डू खा लिए और बेचारे कंवारों को बरगला रहे हैं। विनीत जी, इनकी बातों पर कान न दीजिएगा। सब शादीशुदा मर्द ऐसे ही पोज करते हैं, जैसे खुद कितने बड़े शहीद हैं और उनकी बीवियां कितनी बड़ी डायन। बेचारे डरे-घबराए हैं कि क्‍या करें। आपके घरवाले ठीक कह रहे हैं। उनकी राय पर अमल कीजिए...

     

  12. मनीषा पांडेय
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_26.html?showComment=1204044660000#c7809684903955373355'> 26 फ़रवरी 2008 को 10:21 pm

    अरे हां, एक बात तो कहनी रह ही गई...... मसिजीवी और यूनुस बचिए, मैं अभी नीलिमा और ममता को फोन लगा रही हूं..... वैसे भी औरतें तो डायन होती हैं... आग लगाना उनका काम है.... आपने तो देखा ही होगा, एकता कपूर के सीरियल में...

     

  13. swapandarshi
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_26.html?showComment=1204046880000#c9026993246137753378'> 26 फ़रवरी 2008 को 10:58 pm

    meree to Ph.D ke vaqt kabhee shaadee kee himmat nahee paDee. inact postdoc ke vaqt paDee to bhee miyaa ne hee jyaadaa sambhaalaa hai.

    apart from jokes, before you enter, have a good financial back up, a good friendship with your future spouse, otherwise early years will be hell.

     

  14. मीनाक्षी
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_26.html?showComment=1204055520000#c1105768583811055645'> 27 फ़रवरी 2008 को 1:22 am

    नमस्कार विनीत जी, वैसे तो पढ़ कर निकल जाते थे लेकिन आज गम्भीर मसले पर बातचीत हो रही है तो टिप्पणी देना ज़रूरी लगा.
    मेरी सलाह है कि फौरन शादी कर लें, या तो बहुत खुश रहेंगे या बहुत बड़े दार्शनिक बन जाएँगे. सुकरात भी यही कहते हैं :)

     

  15. अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_26.html?showComment=1204057140000#c2485123677895397724'> 27 फ़रवरी 2008 को 1:49 am

    आप तो स्वघोषित सरकारी दामाद हैं भाई. सरकारी दामाद को दूसरी शादी की बात सोचना भी कनूनी जुर्म है.

    भैया पहले तलाक़ ले लो ( रिसर्च पूरी कर लो ) फिर दूसरी शादी के बारे में सोचना.
    इसके बाद भी जिद पर आमादा हो, तो आपकी मर्ज़ी.


    ( अब एक गम्भीर सलाह- सुनो सबकी, करो मन की)

     

  16. Mired Mirage
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_26.html?showComment=1204069140000#c8140291475334360088'> 27 फ़रवरी 2008 को 5:09 am

    देखिये,यदि खाने की समस्या से तबीयत खराब हो रही है तो दो उपाय हैं ...
    १ खाना बनाना सीख लीजिये ।
    २ माता पिता, भाभी ,बहन से कहकर एक अच्छे महाराज का प्रबन्ध करवा लीजिये ।
    वैसे क्या ये डी यू वाले हॉस्टेल में स्थान नहीं देते ?
    विवाह तभी करें जब महाराज/महाराजिन की बजाय जीवन संगिनी की आवश्यकता महसूस हो । तब भी बेहतर यह होगा कि तभी विवाह करें जब कोई ऐसी आपको स्वयं मिल जाए ।
    घुघूती बासूती

     

  17. Sanjay
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_26.html?showComment=1204076700000#c1209013506264263798'> 27 फ़रवरी 2008 को 7:15 am

    अरे मियां छोटी सी बीमारी का इलाज करने के लिए क्‍या बड़ी बीमारी पालोगे? अभी से चकरा गए.. अभी तो कोई शुभचिंतक पूछेगा... सब ठीक तो है; कहो तो किसी डॉक्‍टर के पास ले चलें... अपने राम तो 15 साल से यही सब सुनते आ रहे हैं. पर हम भी हैं कुत्‍ते की टेढ़ी पूंछ. अब तक नहीं की...बच सको तो बचो... रिसर्च करो मियां... सर्च में लग गए तो गए भैंस पानी में.

     

  18. garima
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_26.html?showComment=1204126020000#c2883513947592370705'> 27 फ़रवरी 2008 को 8:57 pm

    sir aapne to pura swayamber hi rachne ki sochi hai itna vimarsh wo bhi itne bade star per aapka jawab nahi, meri rai me ye pariksha kitni bhi kathin kyon na ho aap ek dum eligible candidate hai aur rha aapki aastha ka sawaal to bina aastha ke is se kabtak bachenge. darasal aap nihayat hi kanjus hai aap chahte hi nahi ki hum log aapki shaadi me saj dhaj ker hungama karen aur yesa nahi hai to pls jaldi se jaldi is khush khabri se hume khush karen.

     

  19. dilip uttam
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_26.html?showComment=1205392920000#c6532315557646319867'> 13 मार्च 2008 को 12:52 pm

    hiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii my aim worldpeace is a my life my dream&concentration as a breath to me.it is not a side of money/selfbenifit.i want do socialwork with honesty;not a only working for it but more harderwork.my book A NAI YUG KI GEETA..is completed.This is in hindi languages .nowadays im suffering many problems like.1.publishers says that u have no enough degree&b.tech students is not a enough for it.&who know you in your country/world so they advice me firstly you concentrate for degree because of at this stage nobody read your book but they also said that your book is good. 2.publishers wants to data for publishing the book.means from where points did you write your book but i have no data because of my book is based on my research.book chapter name is. 1.MAHILA AAJ BHI ABLA HAI KYO . 2. AIM PROJECT {AAP APNA AIM KA % NIKAL SAKTE HO }. 3. MY PHILOSPHEY 4.MERA AIM VISHVSHANTI. 5.POETRY. 6.NAYE YUG KI GITA VASTAV MAY KYA HAI. 7. WORLD {SAMAJ} KI BURAIYA. 8. VISHV RAJ-NITE. ALL THESE CHAPTER COVERD BY ME. 3.max. people told me that firstly u shudro than worry others. they told me now a days all lives for own .why u take tansen for world . i cant understands thease philoshpy. according to my philoshpy in human been charcter; huminity; honesty; worlrpeace &do good work. i have two problem 1. DEGREE. 2. LACK OF MONEY because my parents told me your aim is not any aim &u tents to many difficulties. PLEASE ADVICE ME. IF U CAN GIVE ME YOUR POSYAL ADDRESS &PHONE NO. THAT WILL BE GOOD . THANKS. " JAI HINDAM JAI VISHVATTAM " THANKS.

    my e-mail id worldpeace9990006381@gmail.com

     

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