.

कैम्पस में ये खबर आग की तरह फैल गई है कि ब्लॉगर लोगों को अब डॉलर में माल मिलने लगा है। गूगल वाले डेली के हिसाब से डॉलर में पेमेंट करने लगे हैं। मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी, मैं तो आप ही सरकारी पैसे के चक्कर में तीन दिनों से दौड़ रहा हूं, पहले रुपया में कुछ आ जाए तो फिर डॉलर-वॉलर के बारे में सोचेंगे।

ये तो कल मास्टरजी से साइन कराने विभाग गया तो एक बंदे ने जो कि लगभग फ्रशटियाया हुआ है उसने बताया कि सुना है कि तुम्हारे मोहल्ला वाले अविनाश को रोज चार डॉलर मिलने लगे हैं, पेमेंट गूगल वाले कर रहे हैं। मैंने कहा कि मुझे तो कोई जानकारी नहीं । हां करीब तीन दिन पहले यशंवतदा की एक पोस्ट पढ़ी थी भड़ास कमाऊ बच्चा बन गया, बाप की आंखें भर आईं । यशवंतदा भड़ास के बाप हैं और हम उसके चाचू जो हमने उसी समय कमाई पर अपना हक जता दिया था लेकिन अविनाश भाई मनमारु किस्म के आदमी ठहरे, उत्साह होने पर भी भाव पचा जाते है। शेयर करने के मामले में आलसी आदमी हैं। अभी तक उन्होंने कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है। खैर अगर ऐसा है तो आज न कल बता ही देंगे और कहीं ढंग की जगह पर हलाल कर ही देंगे अपन। उस बंदे का कहना था कि हो न हो कल तुम्हें भी गूगल वाले देने लग जाएं। मैंने मन ही मन सोचा कि आप फिर मेरी लेने लग जाएं। अच्छी खबर तो हैं ही कि ब्लॉग लिखने पर डॉलर मिल रहे हैं लेकिन अपने साथ तो फजीहत है। एक जगह से फेलोशिप मिल रहा है और इधर से मिलने भी लगा तो लोचा हो जाएगा। मैं तो अपने ब्लॉग के आगे लिखने वाला हूं गाहे-बगाहे, अवैतनिक।

एक समय था जब मैं सिर्फ पढ़ता था और पढ़ने में मन भी बहुत लगता था और मैं अक्सर लोगों से कहता कि अगर कोई मुझे रहने-खाने लायक पैसे देता रहे तब मैं जिन्दगी भर पढ़ता रहूंगा, कोई दूसरा काम ही नहीं करुंगा। बार-बार जेआरएफ की परीक्षा देता रहा और आज सचमुच में पढ़ने-लिखने के पैसे मिलने लगे हैं तो मैं वही करता हूं, अपने मन की लिखना और अपने मन की पढ़ना। लेकिन इधर जब से ब्लॉग लिखने लगा हूं तो लगता है कि अब बस ब्लॉग लिखूं और कोई रोज इसके लिए जीने लायक पैसे दे। हो न हो रिसर्च पूरी हो जाने के बाद यही करूं, फुलटाइम ब्लॉगिंग।

बातचीत के क्रम में मैंने कई दोस्तों के मन को टटोला है तो पाया है कि इन्हें अगर सैलरी से थोड़े कम भी पैसे मिल जाएं और अपने मनमुताबिक लिखने का मौका मिले तो ये मीडिया की नौकरी छोड़ देंगे, समाज को अपना आउटपुट ज्यादा देंगे। इनके लिए तो वाकई खुशखबरी है। प्रोड्यूसर की मांग से हटकर वो ज्यादा बेहतर लिख पाएंगे। इधर मीडिया पढ़कर निकले बच्चे जो कि इस लाइन में एकदम खिच्चे( नए-नए) हैं उनको भी एक बेहतर विकल्प मिलेगा। ऐसा होने से ब्लॉगिंग एक मजबूत, सार्थक और मेनस्ट्रीम की मीडिया से कहीं अच्छा माध्यम बन सकेगा। कर्मचारी बन चुका मीडियाकर्मी फिर से पत्रकार होने लगेगा।......

| edit post
14 Response to 'सुना है मोहल्ला के अविनाश को ४ डॉलर मिलते हैं, रोज'
  1. राकेश
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_13.html?showComment=1202887560000#c2752202257215545697'> 13 फ़रवरी 2008 को 12:56 pm

    यार कहीं से हमको भी दिलवा दो. कड़की में सहारा मिल जाएगा.

     

  2. आशीष
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_13.html?showComment=1202888100000#c5154425833743534590'> 13 फ़रवरी 2008 को 1:05 pm

    गुरु कुछ पैसे इधर भी दिलावा दो

     

  3. Raviratlami
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_13.html?showComment=1202889960000#c2932849210970176591'> 13 फ़रवरी 2008 को 1:36 pm

    अविनाश जी और यशवंत जी को बधाई, एवं आपको शुभकामनाएँ.

    मेरा विश्वास है कि इसी तेवर, इसी ऊर्जा से लिखते रहेंगे तो आपका भी स्वप्न यथाशीघ्र पूरा होगा...

     

  4. Sanjeet Tripathi
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_13.html?showComment=1202892840000#c6955372090182998927'> 13 फ़रवरी 2008 को 2:24 pm

    सही है भाया!
    जुगाड़ पता चले तो हमका भी बताए देओ!

     

  5. Pramod Singh
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_13.html?showComment=1202900160000#c8974126494225510248'> 13 फ़रवरी 2008 को 4:26 pm

    घर लोग मनीआर्डर कर रहे हैं कि नहीं? क्‍योंकि नहीं कर रहे हैं तो बड़ी गलत बात है? और कर रहे हैं तो ज़रूर कहीं गलती हो रही है क्‍योंकि हमको अभी तक कोई मनीआर्डर प्राप्‍त नहीं हुआ?

     

  6. Samrendra Sharma
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_13.html?showComment=1202904660000#c2819388083376241196'> 13 फ़रवरी 2008 को 5:41 pm

    bhaiji bahut khoob maine 1 week pahale hi blog banaya meri es field main jankari kam hai plz esi tarah help karte rahen mony order ke liye postel address bhej raha hu
    samrendra sharma ashwani nagar raipur

     

  7. neelima sukhija arora
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_13.html?showComment=1202905620000#c301081689716929404'> 13 फ़रवरी 2008 को 5:57 pm

    हाय रे, हमको कब गूगल बाबा डालर के दर्शन करवाएगा।

     

  8. Tarun
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_13.html?showComment=1202912760000#c3117404680712474052'> 13 फ़रवरी 2008 को 7:56 pm

    डालर डालर तेरा दर्द ना जाने कोय, बेचारा डालर रूपये की मिलती पटखनी से परेशान हुआ जा रहा है लेकिन फिर भी जय जय डालर की हो रही है ;)

     

  9. Amar
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_13.html?showComment=1202919900000#c281223676912498583'> 13 फ़रवरी 2008 को 9:55 pm

    bhaiya do-char dollar mere liye bhi jugaar karde..waise bhi aajkal IT ka market gir raha hai...

     

  10. Pankaj Parashar
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_13.html?showComment=1203067800000#c6960619029874030020'> 15 फ़रवरी 2008 को 3:00 pm

    www.khwabkadar.blogspot.com.
    ka link apne blog par de dijiye guru.
    Pankaj Parashar

     

  11. dilip uttam
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_13.html?showComment=1204790700000#c1454785269933114097'> 6 मार्च 2008 को 1:35 pm

    see my site "www.thevishvattam.blogspot.com" jai hindam jai vishvattam

     

  12. dilip uttam
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_13.html?showComment=1204790880000#c3790055682588346577'> 6 मार्च 2008 को 1:38 pm

    once see my site thanks

     

  13. dilip uttam
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_13.html?showComment=1204791000000#c3334483221450685788'> 6 मार्च 2008 को 1:40 pm

    hiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii my aim worldpeace is a my life my dream&concentration as a breath to me.it is not a side of money/selfbenifit.i want do socialwork with honesty;not a only working for it but more harderwork.my book A NAI YUG KI GEETA..is completed.This is in hindi languages .nowadays im suffering many problems like.1.publishers says that u have no enough degree&b.tech students is not a enough for it.&who know you in your country/world so they advice me firstly you concentrate for degree because of at this stage nobody read your book but they also said that your book is good. 2.publishers wants to data for publishing the book.means from where points did you write your book but i have no data because of my book is based on my research.book chapter name is. 1.MAHILA AAJ BHI ABLA HAI KYO . 2. AIM PROJECT {AAP APNA AIM KA % NIKAL SAKTE HO }. 3. MY PHILOSPHEY 4.MERA AIM VISHVSHANTI. 5.POETRY. 6.NAYE YUG KI GITA VASTAV MAY KYA HAI. 7. WORLD {SAMAJ} KI BURAIYA. 8. VISHV RAJ-NITE. ALL THESE CHAPTER COVERD BY ME. 3.max. people told me that firstly u shudro than worry others. they told me now a days all lives for own .why u take tansen for world . i cant understands thease philoshpy. according to my philoshpy in human been charcter; huminity; honesty; worlrpeace &do good work. i have two problem 1. DEGREE. 2. LACK OF MONEY because my parents told me your aim is not any aim &u tents to many difficulties. PLEASE ADVICE ME. IF U CAN GIVE ME YOUR POSYAL ADDRESS &PHONE NO. THAT WILL BE GOOD . THANKS. " JAI HINDAM JAI VISHVATTAM " THANKS.

     

  14. dilip uttam
    http://taanabaana.blogspot.com/2008/02/blog-post_13.html?showComment=1205393160000#c3932011048945790394'> 13 मार्च 2008 को 12:56 pm

    see my site www.thevishvattam.blogspot.com hiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii my aim worldpeace is a my life my dream&concentration as a breath to me.it is not a side of money/selfbenifit.i want do socialwork with honesty;not a only working for it but more harderwork.my book A NAI YUG KI GEETA..is completed.This is in hindi languages .nowadays im suffering many problems like.1.publishers says that u have no enough degree&b.tech students is not a enough for it.&who know you in your country/world so they advice me firstly you concentrate for degree because of at this stage nobody read your book but they also said that your book is good. 2.publishers wants to data for publishing the book.means from where points did you write your book but i have no data because of my book is based on my research.book chapter name is. 1.MAHILA AAJ BHI ABLA HAI KYO . 2. AIM PROJECT {AAP APNA AIM KA % NIKAL SAKTE HO }. 3. MY PHILOSPHEY 4.MERA AIM VISHVSHANTI. 5.POETRY. 6.NAYE YUG KI GITA VASTAV MAY KYA HAI. 7. WORLD {SAMAJ} KI BURAIYA. 8. VISHV RAJ-NITE. ALL THESE CHAPTER COVERD BY ME. 3.max. people told me that firstly u shudro than worry others. they told me now a days all lives for own .why u take tansen for world . i cant understands thease philoshpy. according to my philoshpy in human been charcter; huminity; honesty; worlrpeace &do good work. i have two problem 1. DEGREE. 2. LACK OF MONEY because my parents told me your aim is not any aim &u tents to many difficulties. PLEASE ADVICE ME. IF U CAN GIVE ME YOUR POSYAL ADDRESS &PHONE NO. THAT WILL BE GOOD . THANKS. " JAI HINDAM JAI VISHVATTAM " THANKS.

    my e-mail id worldpeace9990006381@gmail.com

     

एक टिप्पणी भेजें