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2G स्पेक्ट्रम घोटाला मामले में बरखा दत्त का नाम आने के बाद जिस तरह से लीपापोती का दौर शुरु हुआ है,पूरी कोशिश की गयी कि उसकी साख पहले की तरह बनी रहे। एनडीटीवी चैनल ने अपनी ऑफिशियल साइट पर इन सारी बातों को बेसलेस तक करार दिया लेकिन बरखा दत्त की गिरती हुई साख को रोक पाना कहीं से भी आसान नहीं दिख रहा। उल्टे अब इस साख की व्याख्या बिजनेस इन्डस्ट्री में भी होनी शुरु हो गयी है। बिजनेस और शेयर की सबसे लोकप्रिय बेवसाइट मनीकंट्रोल डॉट कॉम पर गेस्ट और टिप्पणीकारों ने बरखा दत्त की साख गिरने के बाद चैनल की सेहत क्या होगी,इसका आकलन करना शुरु कर दिया है। साइट में गेस्ट ने बरखागेट इम्पैक्ट नाम से एक शब्द गढ़ते हुए अनुमान लगाया है कि इस चैनल के शेयर की कीमत जल्द ही 50-60 रुपये हो जाएगी और फिलहाल इसके शेयर खरीदना किसी भी मामले में फायदेमंद नहीं है। इससे ठीक उल्टे जिनके पास ये शेयर हैं वो इसे भढञत की उम्मीद से लेकर बैठे हैं,भलाई इसी में है कि अभी ही इसे वो निबटा दें। पोस्ट लिखे जाने तक चैनल के शेयर की कीमत 87.95 रुपये है जो कि 2.51 प्रतिशत की बढ़त पर है। जिस चैनल ने कभी 482 रुपये के शेयर की कीमत देखी हो,उसके आगे ये कीमत हताश करनेवाली है। 8 मई 2009 को जब हमने पोस्ट लिखी थी हवा हो जाएगा एनडीटीवी और तब चैनल को 160.30 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था जिसे कि उसने शेयर बेचकर मुनाफे के तौर पर दिखाने की कोशिश की थी। उस समय भी चैनल के शेयर की कीमत इतनी खराब नहीं थी। पोस्ट लिखते वक्त शेयर की कीमत 119.85 रुपये थी।

 अभी बरखा दत्त का मामला ज्यादातर ओपन मैगजीन, छिटपुट तरीके से एकाध अंग्रेजी अखबारों और वर्चुअल स्पेस पर ही है लेकिन जिस तरह से बाकी के लोग अपने को पाक-साफ बताने के लिए बातों को आगे ले जा रहे हैं,जल्द ही ये बात एक सामान्य पाठक और शेयरधारकों तक पहुंचेगी। फिर संभव है कि इसका बहुत ही निगेटिव असर होगा। शुरुआती दौर में जिस तरह से मीडिया मुंह पर टेप लगाकर 2G स्पेक्ट्रम घोटाले की बात करते हुए भी मीडिया मसले को इससे पूरी तरह अलग रखा लेकिन वर्चुअल स्पेस से बने प्रेशर ने उन्हें मुंह खोलने के लिए मजबूर किया,ऐसे में एक-एक करके शक के घेरे में आए पत्रकार खुद ही इसे लेकर अपनी सफाई देने लग गए हैं। ऐसा करते हुए उन्हें भले ही लग रहा हो कि उनके पक्ष में जनाधार मजबूत होगा लेकिन दरअसल इससे मामला ज्यादा लोगों तक जा रहा है और वो भी मीडियाकर्मियों को शक की निगाह से देखन लगे हैं। ऐसे में सोशल इमेज के करप्ट होते ही उसका असर बिजनेस पर दिखने शुरु होंगे।

 वैसे तो अब मीडिया में किसी की साख गिरने से तह तक बहुत फर्क नहीं पड़ता जब तक कि उसका सीधा असर बिजनेस पर न पड़ने लग जाएं। ऐसा इसलिए कि आज मीडिया साख पर नहीं बिजनेस पर आधारित है। किसी मीडिया हाउस या फिर मीडियाकर्मी की साख अगर चली भी जाती है लेकिन बिजनेस पर उसका कोई नुकसान नहीं होता तो उसे नुकसान नहीं माना जाता। पेड न्यूज के मामले में हमने देखा कि देश के एक से एक प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान जिसमें कि दि हिन्दू जैसे अंग्रेजी के अखबार भी शामिल रहे,उसकी साख शक के घेरे में आ गयी। हिन्दी के अखबार दैनिक जागरण और दैनिक भास्कर का नाम विशेष तौर पर आया लेकिन फिलहाल उसके बिजनेस पर कोई असर नहीं पड़ा तो मानकर चलिए कि बाजार में उसकी साख अभी भी बरकरार है। लेकिन जैसे ही इस साख का सवाल बिजनेस से जुड़ने शुरु होते हैं तब चैनल या फिर मीडियाकर्मी को सीधे नुकसान होने शुरु हो जाते हैं। बरखा दत्त के साथ संभव हो कि कुछ ऐसा ही हो। सोशल प्रेशर में न सही लेकिन बिजनेस प्रेशर में ही सही,उन्हें एनडीटीवी से अलग करनी पड़ जाए। एक दूसरे गेस्ट ने मनीकंट्रोल डॉट कॉम की ही साइट पर लिखा है कि लोगों ने चैनल और साइट का बहिष्कार करना शुरु कर दिया है। इस तरह से एक सीधा सा फार्मूला बनता है कि- पब्लिक के भरोसे में कमी का मतलब है टीआरपी में नुकसान और टीआरपी में नुकसान मतलब बिजनेस में नुकसान। ऐसे में संभव है कि चैनल इस नुकसान को बर्दाश्त न करने की स्थिति में बरखा दत्त को सम्मानित तरीके से इस्तीफा देने के लिए दबाव बना सकता है।

बिगबुल 1979 नाम से एक तीसरे शख्स ने कमेंट करते हुए लिखा है कि बरखा भी रहेगी और एनडीटीवी भी रहेगा लेकिन इसका असर तो होगा ही। इसलिए मैं शेयर बेचने जा रहा हूं। यहां पर आकर सोशल इमेज की बात थोड़ी देर के लिए छोड़ भी दें तो( ये जानते हुए कि चैनल ने बरखा दत्त के बचाव में बहुत ही लचर तर्क दिए थे) बिजनेस के लिहाज से एक निगेटिव माहौल बनने शुरु हो गए हैं। ऐसे में एक बड़ा सवाल है कि क्या चैनल बरखा दत्त के रहने की स्थिति में अपने इस आर्थिक घाटे को बर्दाश्त करना पसंद करेगा?

इधर बरखा दत्त को एकदम से एनडीटी से इस्तीफा के लिए बात करना दो कारणों से आसान नहीं होगा। एक तो ये कि लंबे समय से उसने चैनल को एक विश्वसनीय मजबूत कंधे के तौर पर साथ दिया है लेकिन उससे भी बड़ी बात जिसे कि दिलीप मंडल ने फेसबुक पर हमसे साझा किया है वो ये कि जिस वक्त एनडीटीवी इमैजिन को लेकर जोरदार कैम्पेन चल रहे थे और नए और यंग ऑडिएंस को चैनल से जोड़ने की कोशिशें की जा रही थी जिसमें फेसबुक,ट्विटर से लेकर तमाम न्यू मीडिया के साधन आजमाए गए,इन सारे काम के लिए नीरा राडिया की कम्पनी विटकॉम लिमिटेड ही कर रही थी। दिलीप मंडल की स्टेटस लाइन है-

जब इमेजिन चैनल का नाम एनडीटीवी इमेजिन हुआ करता था तब उसके प्रचार का जिम्मा नीरा राडिया की कंपनी विटकॉम ने संभाला था!!- we, at Vitcom came up with a specifically targeted social media campaign for NDTV Imagine. We had to weave the social media campaign to attract youth. For which, Vitcom Digital created a specific Social Media campaign largely using Facebook, Twitter, Orkut and YouTube. 


यहां से पूरे मामले के विश्लेषण को लेकर एक नए अध्याय की शुरुआत होती है। अब देखना ये है कि इस अध्याय का विश्लेषण किस रुप में होता है,होता है भी या नहीं। या फिर ऐसा कुछ किया जाना जरुरी है भी या नहीं।

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6 Response to 'पिट रहा है एनडीटीवी का शेयर, बरखा दत्त का जल्द ही होगा पत्ता साफ?'
  1. shikha varshney
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/11/blog-post_29.html?showComment=1291034851265#c739895408640489318'> 29 नवंबर 2010 को 6:17 pm

    विचारणीय ...चिंतनीय...

     

  2. सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/11/blog-post_29.html?showComment=1291039533309#c1511724446449536223'> 29 नवंबर 2010 को 7:35 pm

    बरखा दत्त को तत्काल टीवी स्क्रीन से अलग हो जाना चाहिए। जरूर झेंप आती होगी उन्हें। कुछ समय के ब्रेक से वे पब्लिक मेमोरी से गायब हो जाएंगी। इस बीच कुछ अच्छी डाक्यूमेंट्री बनाने में लगा सकती हैं। विषय होना चाहिए- “मीडिया, राजनीति और बिजनेस का गठजोड़: आदर्श और व्यवहार”

    जब सभी लोग अपना उल्लू सीधा करने में लगे हुए हैं तो पत्रकार बिरादरी से दूध का धुला होने की उम्मीद करना बेमानी है।

    रुपया खुदा तो नहीं लेकिन खुदा से कम भी नहीं:)
    सभी खुदा के बन्दे हैं जी...।

     

  3. Rangnath Singh
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/11/blog-post_29.html?showComment=1291043482844#c4261090138388995595'> 29 नवंबर 2010 को 8:41 pm

    बहुत अच्छी खबर दी आपने। नैतिकता नहीं बाजार ही सही...

     

  4. मिहिरभोज
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/11/blog-post_29.html?showComment=1291092029104#c1985629336666474236'> 30 नवंबर 2010 को 10:10 am

    दरअसल मीडिया ने बहुत बार जनता की आवाज को उठाने की बजाय उनको तोङ मरोङकर पेश करने का काम किया है........पहली बार ऊंट पहाङ के नीचे आया है.....

     

  5. Neeraj Rohilla
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/11/blog-post_29.html?showComment=1291137707371#c7060088767476750463'> 30 नवंबर 2010 को 10:51 pm

    वाह,
    गेस्ट पोस्ट और फ़ोरम्स से बढिया निष्कर्ष निकाले हैं। अगली बार रेडिफ़ और टाईम्स आफ़ इंडिया के कमेन्ट्स से भारत की विदेश नीति भी निर्धारित हो सकती है।

    बधाई

     

  6. ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/11/blog-post_29.html?showComment=1291172569699#c6101705738104546820'> 1 दिसंबर 2010 को 8:32 am

    Vineet, I had been critical of the media all through and this Barkhagate has made me brood further. With social media and the Leaks, it won't be possible for media to be mighty media.

    However vernacular press is still largely isolated and its business will be intact for it is largely fed by street/town level news and may continue its old ways for about a decade. Its own micro-Barkha's can continue in old style on the contacts with SP and DM of the district and "daan" of the state govt!

     

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