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बरखा दत्त की जगह अभी कोई और होती तो या तो सलाखों के पीछे होती या फिर उसे अपनी कुर्सी गंवानी पड़ती। मामला सच है या फिर झूठ, इसका फैसला बाद में होता। वैसे भी इस देश में दो तरह के फैसले काम करते हैं। एक कानून और कचहरी का फैसला जिसकी गति बहुत ही मंद है और दूसरा मीडिया का फैसला। कचहरी का फैसला आए इससे पहले कि मीडिया अपने तरीके से फैसले कर देता है।.इस तरह से पैकेज बनाए जाते हैं,शब्दों का प्रयोग किया जाता है,ऐसी इमेज बनायी जाती है कि जिस शख्स पर आरोप लगे होते हैं वह आम लोगों की निगाह में पूरी तरह दोषी करार दिया जा चुका होता है। इन दिनों में मैं वक्त है एक ब्रेक का( न्यूज चैनलों की कहानियां) पढञ रहा हूं और उसमें कई ऐसे संदर्भ हैं जो यह साफ कर देते हैं कि मीडिया आरोपी और दोषी के बीच की विभाजन रेखा को ब्लग कर देता है। मीडिया के फैसले के हिसाब से बात करें तो बरखा दत्त ने न केवल टेलीविजन जर्नलिस्जम को दागदार किया बल्कि देश की उन लाखों लड़कियों के बीच एक बड़ी दुविधा,बड़ा सवाल छोड़ दिया कि- क्या वो अब बरखा दत्त बनन चाहेगी? ये सिर्फ बरखा दत्त के लिए ही नहीं बल्कि हम सब के लिए,पूरी मीडिया इन्डस्ट्री केलिए खुशकिस्मती होगी कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में नीरा राडिया के साथ बरखा दत्त का भी नाम आना लगा है, वह पूरी तरह गलत हो। ऐसा होने से न केवल बरखा दत्त की की ध्वस्त होती छवि टूटने से बचेगी बल्कि देश की लाखों लड़कियों का सपना बच सकेगा जो कि बरखा दत्त जैसी बनन चाहती है। लेकिन

ऐसा हो इसके पहले भड़ास4मीडिया ने नीरा राडिया और बरखा दत्त के बीच हुई बातचीत की ऑडियो जारी करने शुरु कर दिए हैं। अभी तक साइट ने दो खंड़ प्रकाशित कर दिए हैं और आगे भी इस ऑडियो को बढ़ाने की संभावना है। एक तो संभव है कि उसमें बरखा दत्त की बातचीत के और भी अंश हो और दूसरा कि इस घोटाले के साथ वीर सिंघवी( हिन्दूस्तान टाइम्स) का भी नाम है। साइट को इनकी बातचीत के अंश प्रकाशित करनी है। ऑडियो सुनकर जो पहली बार समझ आता है वो यह कि बरखा दत्त राजनीतिक उठापटक में सिर्फ एक पत्रकार की हैसियत से दिलचस्पी नहीं लेती हैं और न ही कोई तह तक की बातें हम तक पहुंचाने के लिए जानकारी इकठ्ठा कर रही हैं। अगर ऐसा होता तो आज वो खुद इस घोटाले की स्ट्रिंग ऑपरेशन हम तक पहंचा चुकी होती। जाहिर है उनकी ये दिलचस्पी एक पत्रकार से कहीं आगे की है। नहीं तो मंत्रियों के बनने न बनने की बात वो नीरा राडिया से क्यों करती? ऑडियो में जो दोनों के बीच के संवाद हैं, वो अपने आप में कई सवाल छोड़ जाते हैं।

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में बड़े पत्रकारों( प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक) के होने की बात हिन्दी न्यूज चैनल का सबसे जाना-पहचाना चेहर पुण्य प्रसून वाजपेयी ने भी की थी। भड़ास4मीडिया ने इस बात की चर्चा करते हुए पुण्य प्रसून वाजपेयी के ब्लॉग की उस पोस्ट का हिस्सा हमारे सामने रखा-''...नीरा राडिया ने अपने काम को अंजाम देने के लिये मीडिया के उन प्रभावी पत्रकारों को भी मैनेज किया किया, जिनकी हैसियत राजनीतिक हलियारे में खासी है।'' इसी पोस्ट में एक और जगह वे लिखते हैं- ''... नीरा राडिया हर उस हथियार का इस्तेमाल इसके लिये कर रही थीं, जिसमें मीडिया के कई नामचीन चेहरे भी शामिल हुये, जो लगातार राजनीतिक गलियारों में इस बात की पैरवी कर रहे थे कि राजा को ही संचार व सूचना तकनीक मंत्रालय मिले.''

इससे पहले भी मीडियाखबर डॉट कॉम ने न्यूजx की डूबने की कहानी बताने के दौरान इस घोटाले में मीडिया दिग्गजों के शामिल होने की बात उठायी थी। लेकिन ये मामला चूंकि सीधे-सीधे मीडिया से जुड़े लोगों का था तो मेनस्ट्रीम की मीडिया ने जान-बूझकर अंजान बनने का नाटक किया। मीडिया के लोगों के बीच वेबसाइटों और पोर्टल पर आनेवाली खबरों की विश्वसनीयता को लेकर मीडिया के लोगों की ओर से जबरदस्त तरीके से संदेह फैलाए जाते हैं,उसके पीछे कहीं न कहीं सच के सामने आ जाने का डर काम करता है। लेकिन आज हम जिस दौर में जी रहे हैं,उसमें एक बात तो साफ है कि मेनस्ट्रीम मीडिया लाख कोशिशें कर ले,वो मीडिया मंडी के भीतर चल रही दलाली, घूसखोरी, दबंगई को पूरी तरह दबा नहीं सकता। इस बात की संभावना फिर भी जतायी जा सकती है कि संभव है कि बरखा दत्त का इसमें कोई भूमिका न हो,वो बेदाग होकर हमारे सामने निकले। लेकिन जब तक ऐसा नहीं होता है,तब तक मीडिया के फैसले सुनाने के फर्मूले के तहत सोचें तो क्या निकलकर आता है,उसका कौन सा चेहरा हमारे सामने होता ? करगिल के बम धमाकों के बीच से पीटीसी देती हुई, वी दि पीपल में हक की आवाज बुलंद करती हुई, लक्ष्य जैसी फिल्म में प्रीति जिंटा के भीतर घुस आयी एक ईमानदार पत्रकार की आत्मा की या फिर राजनीतिक जोड़-तोड़ के लिए नीरा राडिया जैसी देश की सबसे बड़ी लॉबिइस्ट से फोन पर बात करती हुई? क्या बीए,एमए,डिप्लोमा करनेवाली, इन्टर्नशिप करती हुई,टेप इन्जस्ट और काउंटर नोट करती हुई देश की लाखों लड़कियां बनना चाहेगी ऐसी बरखा दत्त?

भड़ास4मीडिया पर जाने के लिए चटकाएं- http://www.bhadas4media.com
जारी की गयी ऑडियो के अंश- http://www.bhadas4media.com/tv/7432-2010-11-18-14-52-55.html
                                                http://www.bhadas4media.com/tv/7433-2010-11-18-15-11-39.html
                                                http://www.bhadas4media.com/tv/7434-2010-11-18-15-41-59.html
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4 Response to 'बरखा दत्त का असली चेहरा सबके सामने'
  1. Prashant K Pan
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/11/blog-post_18.html?showComment=1290099268993#c6604207033810520076'> 18 नवंबर 2010 को 10:24 pm

    Well done Vinit!! really appreciate your efforts for showing backstage drama of media. well done !!

     

  2. संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/11/blog-post_18.html?showComment=1290099617638#c9068182833293625578'> 18 नवंबर 2010 को 10:30 pm

    khulasa chahe jaisa aur jiska ho media ko eksa hona chahiye par kahte hain imaandari ki asal pareeksha tabhi hoti hai,jab swayam ki saakh daanv par lagi ho.doosre ke liye to sabhi updesh de lete hain.yahi khulasa kisi neta ke baare me hota to media asman sir par utha leta !

     

  3. Neeraj Rohilla
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/11/blog-post_18.html?showComment=1290142750497#c4144825991458365580'> 19 नवंबर 2010 को 10:29 am

    विनीत,
    मैने पांचो फ़ाईल्स में हुयी बातचीत को सुना, लेकिन उसमें बरखा की बातचीत को लेकर आपका उन पर क्या आरोप है?
    आपने इतनी लम्बी पोस्ट लिखी, उनकी तस्वीर पर शेम शेम भी चिपका दिया, यहां तक कि इतने गम्भीर निष्कर्ष तक दे दिये, ..."मीडिया के फैसले के हिसाब से बात करें तो बरखा दत्त ने न केवल टेलीविजन जर्नलिस्जम को दागदार किया बल्कि देश की उन लाखों लड़कियों के बीच एक बड़ी दुविधा,बड़ा सवाल छोड़ दिया कि- क्या वो अब बरखा दत्त बनन चाहेगी?"

    लेकिन पूरी पोस्ट में नहीं बताया कि उन्होने आखिर किया क्या ? क्या गलत किया और किस कारण से आप उसे गलत कह रहे हैं। मेरा ये पूछने का कारण है कि भारतीय चैनल न देख पाने और इंटरनेट पर इस घटना के बारे में अधिक जानकारी न होने के चलते केवल उन आडियो फ़ाईल्स को ही सुन पाया और समझ में नहीं आया। क्योंकि न कहीं फ़िक्सिंग की बात सुनायी पडी और न ही लगा कि कोई गैरकानूनी बात हो रही है।

    सरकार बनने में विभिन्न दलों की मुख्य पार्टी से मंत्रालयों को लेकर ऐसे नेगोशियेशंस होते ही हैं। अगर इसे सुनकर आप अब जगे हैं तो क्या कहने,

    शुभकामनाये,

     

  4. Neeraj Rohilla
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/11/blog-post_18.html?showComment=1290143337254#c3256745179628532956'> 19 नवंबर 2010 को 10:38 am

    ओके,
    एक फ़ाईल जो मुख्य थी, वो मिस हो गयी थी । अब कुछ माजरा थोडा थोडा समझ में आ रहा है।

     

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