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आज की महिला को राम जैसा पति नहीं चाहिए। उसे थोड़ा बैड व्ऑय चाहिए। महिलाएं हो गयी और 'बोल्ड' नाम से अपने खास कार्यक्रम में एंकर ने साफ तौर पर कहा कि अब महिलाओं को राम जैसा पति नहीं चाहिए। फेसबुक पर जब मैंने इस लाइन को साझा किया तो 'हंस' पत्रिका में जेंडर जिहाद नाम से नियमित स्तंभ लिखनेवाली स्त्री मामलों की युवा विमर्शकार शीबा असलम फहमी ने सीधा सवाल किया कि- आप भी विनीत! क्या रामजी उस मामले में कमजोर थे जो अब नहीं चाहिए?

भारतीयता, संस्कृति और काफी हद तक हिन्दुत्व के नाम पर अपनी दूकान चलानेवाले आजतक चैनल को इस बात का अंदाजा क्यों नहीं है कि इस देश की करोड़ों जनता अगर राम को अपना आदर्श मान रही है तो उस आदर्श होने  में उनकी सेक्सुअल कैपिसिटी भी शामिल है। वैसे भी इस देश में तो आदर्श वही पुरुष हो सकता है जो कि संतान पैदा करने की क्षमता रखता हो। यहां तो सेक्स को लेकर पूरी अवधारणा ही इस आधार पर विकसित हुई है कि संभोग का परिणति संतान में होना अनिवार्य है,यह सिर्फ आनंद के लिए नहीं है। ये जार्ज लूकाच की अवधारणा तो है नहीं कि सेक्स का पहला काम प्लेजर है,आनंद है। कोई जरुरी नहीं कि इसे संतान पैदा करने के लिेए ही किया जाए। संभवतः यही वजह है कि यहां लोग सेक्स करने पर अगर संतान पैदा करने की बात नहीं सोचते तो अपराध करने जैसा करार दिए जाते हैं। इसे दूसरी तरह से कहें तो जो संतान पैदा करने की क्षमता नहीं रखता,उसे जीने तक का अधिकार नहीं है। अभी दो दिन से आपलोगों ने इसी चैनल पर देखा न कि राखी ने एक पुरुष को जब नामर्द कहा और वो भी एक बार तो इस चैनल ने उसे लूप करके कई बार चलाया और कहा कि उसने नामर्द कहे जाने पर सदमा झेल नहीं पाया और आत्महत्या कर ली। अब महिलाओं को राम जैसा पति नहीं चाहिए,आजतक के ऐसा कहने का क्या मतलब है?

मामला साफ है कि जो देश राम के नाम पर मिनट भर में सुलग सकता है,वो इस देश के चिन्हों को तहस-नहस कर सकता है,वो किसी को जिंदा जला सकता है,आजतक जैसा चैनल अगर उसके पुरुषत्व को लेकर सवाल खड़े करता है तो इसे किस रुप में लेगा? अब महिलाओं को राम की जगह बैड ब्ऑय चाहिए। राम के साथ ये जुमला जोड़कर चैनल क्या साबित करना चाहता है कि एक पुरुष या पति के तौर पर श्रीराम पत्नी के आगे आरती उतारने का काम करते होंगे और इसलिए वो अच्छे कहलाएं जिससे कि आज की स्त्रियों को परहेज है? आज की महिलाओं को बोल्ड और बिंदास दिखाने के फेर में आजतक चैनल ने कितनी बड़ी बात कही है,इसका अंदाजा जनता अगर रिएक्ट करना शुरु करती है तो उससे लग सकता है। तुकबंदी और जुमलेबाजी में महारथ हासिल करनेवाले इस चैनल को शायद इस बात की फीडबैक नहीं मिलती होगी कि उसके ब्रॉडकास्ट किए गए एक-एक शब्द को ऑडिएंस किस रुप में लेती है? हरियाणा के खाप पंचात के लिए चैनल की एडीटिंग मशीन की संतानों ने लगातार तालिबानी शब्द का प्रयोग किया। ये शब्द वहां के लोगों को इतना चोट कर गया कि मिर्चपुर में जब हमने बताया कि दिल्ली से आए हैं और पूछा कि पत्रकार हो तो करीब चार सौ लोगों ने हमें मिनट भर के अंदर घेर लिया और तन गया कि क्या हम तुम्हें तालिबानी दिखते हैं? इस तरह की खबरें प्रसारित करके चैनल कितने मीडियाकर्मियों की जान जोखिम में डालने का काम करता है,इसका आभास शायद उसे नहीं है।

आजतक चैनल ने सेक्स को लेकर सर्वे की यह सवारी इंडिया टुडे पत्रिका के ताजा अंक में सेक्स सर्वे पर चढकर की है जिसमें कहने को तो देश की महिलाओं को लेकर सर्वे किया गया है लेकिन वो दरअसल स्त्री और सेक्स से जुड़े उन चालू मसलों पर आधारित है जिसे कि मंडी में बेहतर तरीके से बेची जा सके। पिछले कई सालों से पत्रिकाओं की ओर से सेक्स को लेकर जो सर्वे होते आए हैं,उनकी प्रस्तुति और विजुअल्स साफ कर देते हैं कि ऐसे अंक निकालने की प्रेरणा उन्हें पोर्नोग्राफी पोर्टल,मैगजीनों से देखकर मिलती है। ये प्रिंट मीडिया में वही घिनौना खेल है जो कि चैनलों के लिए हरेक बुधवार के लिए किए जाते हैं। चैनल ने विजुअल्स के तौर पर सड़कों पर चलती, शॉपिंग करती, बात करती हुई लडकियों को दिखाया हैं। इन विजुअल्स से लड़कियों को लेकर जिस खुलेपन और आत्मविश्वास का बोध होता है वो बोल्ड शब्द के नजदीक का नहीं है। ये एक सामाजिक स्थिति है जबकि चैनल ने इसे सेक्स,पोर्नोग्राफी और बोल्ड मिलाकर एक करके दिखाने की कोशिश की है। एथिक्स के लिहाज से चैनल को इस बात का जबाब देना होगा कि उसने जिन लड़कियों को संदर्भ बदलकर दिखाने की कोशिश की क्या उन सबों की अनुमति उनके पास है?

हालांकि ये बात चैनल और पत्रिका के लिए भैंस के आगे बीन बजाने जैसा होगा लेकिन गौर करनेवाली बात तो है ही अगर स्त्री और सेक्स को लेकर सर्वे किए जाते हैं तो क्या ये सर्वे का हिस्सा नहीं है कि इस देश में कितनी लड़कियां चरित्र पर शक किए जाने की स्थिति में छोड़ दी जाती है,कितनी स्त्रियों से परस्त्री के साथ संबंध होने पर पुरुष दबाव बनाकर डिबोर्स लेने की बात करता है? कितनी स्त्रियों की जिंदगी पोस्ट मैरिटल अफेयर से तबाह होती है,कितनी स्त्रियों की जिंदगी टीन एज में ही उनसकी इच्छा के खिलाफ ही बर्बाद कर दी गयी? चैनल को इस बात का अधिकार नहीं है कि सेक्स और पोर्नोग्राफी को एक कर दे। इस देश में अगर सेक्स शिक्षा को लेकर अगर बबाल मचते हैं तो उसके पीछे कहीं न कहीं इस तरह की स्टोरी काम करती है जो कि सेक्स को लेकर अनिवार्य समझ औऱ पोर्नोग्राफी के बीच की स्थिति को ब्लर कर देते हैं। ऐसा किया जाना प्रोग्रेसिव एप्रोच को कुचल देना है।

स्क्रीन पर चटकारे लेकर और स्टोरी के हिसाब से ही लाल पोशाक में एंकर स्टोरी की शुरुआत करती है उससे साफ हो जाता है वो इस देश के कुंठा की शिकार ऑडिएंस को संबोधित कर रही है और इस क्रम में उसकी खुद की कुंठा जब-तब छलक जा रही है। वहीं पुरुष आवाज में जो वीओ कर रहा है उसका अंदाज ऐसा कि वो किसी अंग्रेजी पोर्नोग्राफी को देखते हुए उसका वर्णन अपने उन दोस्तों के लिए कर रहा है जो कि अंग्रेजी नहीं समझते और उन्हें हिन्दी तर्जुमा की जरुरत है। चैनल के लिे ये सब एक खेल और तान देने का हिस्साभर है लेकिन ये बात उसकी चिंता से बाहर है कि उसके ऐसा किए जाने से कुंठा में जी रहे समाज का नजरिया पहले से औऱ कितना मजबूत होता है? राम के सवाल पर और पोर्नोग्रापी और सेक्स के सवाल पर चैनल को जबाब देना भारी पड़ सकता है।

शीबा असलम फहमी का आजतक से सीधा सवाल-
AajTak Channel se poochha jana chahiye ki
1). Kya adarsh-Pati hona aur 'sexually competent Pati' hona alag baat hai?
2). Ye kaisa sawal hai ki Hum Bhartiye Nariyon ko Pati me kya chahiye, sex ya Ram?
3.) Kya adarsh-mard wahi jo Patni ka bhi Bhai ho?

4). Aur Sita ji ko agni pareeksha kya isliye deni padi ki wo unke khayal se sexually over-active thin? Kya un par bharosa nahi kiya ja sakta tha? Badi be-dhangi baten hain ye sab!
kul mila kar fayde ki chahat ne vigat 20 saalon me Sri Ram ka jitna dohan kiya hai ye uski ek misal hai. Pehle unhen ek War-cry ke Villain ki tarah pesh kiya, ab dayneey bana rahe hain.
Khair hame bhi samajhna hoga ki is charcha se bhi unki TRP na badh jae kahin aur we apne be-dhangepan se bhi na kamyab ho jaen


इस वेशर्म वीडियो के लिए चटकाएं-http://aajtak.intoday.in/videoplay.php/videos/view/43579/2/116/Jewel-of-women-now-is-no-shame.html
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5 Response to 'आजतक चैनल को राम के पुरुषत्व पर शक है'
  1. chandra prakash rai
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/11/blog-post_14.html?showComment=1289758431670#c7887750181474502005'> 14 नवंबर 2010 को 11:43 pm

    are bap re vineet ji ab kya hoga ,ab to >>>>>>>>>>>....

     

  2. chandra prakash rai
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/11/blog-post_14.html?showComment=1289758487015#c6834866239525190193'> 14 नवंबर 2010 को 11:44 pm

    mai ye kah raha tha ki ram ko manane vale kya kahenge ,kyo ,kya .kab ,kaise

     

  3. गुस्ताख़ मंजीत
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/11/blog-post_14.html?showComment=1289761645635#c6690266664203622574'> 15 नवंबर 2010 को 12:37 am

    हां तो सेक्स को लेकर पूरी अवधारणा ही इस आधार पर विकसित हुई है कि संभोग का परिणति संतान में होना अनिवार्य है,यह सिर्फ आनंद के लिए नहीं है। ये जार्ज लूकाच की अवधारणा तो है नहीं कि सेक्स का पहला काम प्लेजर है,आनंद है। ----विनीत ऐसा कहना एकांगी होगा। अगर आप विपरीत रति की धारणा से वाकिफ होते तो सारा ठीकरा जॉर्ज लूकाच के मत्थे नही फोड़ कर रह जाते..बिना गर्भाधान के संभोग तो हमारी भारतीय संस्कृति की देन है। स्थापना हेतु एक लिंक दे रहा हूं मेरे ही ब्लाग का है---http://gustakh.blogspot.com/2010/11/blog-post.html

     

  4. anjule shyam
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/11/blog-post_14.html?showComment=1289826844525#c1846953575922077656'> 15 नवंबर 2010 को 6:44 pm

    पता नहीं क्यों लग रहा है जैसे आज तक के लोग सलमान कि मार्केटिंग करने में लगे हैं....

     

  5. आशीष सिंह
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/11/blog-post_14.html?showComment=1290557422321#c6123958184056075690'> 24 नवंबर 2010 को 5:40 am

    ख़ास बात है इधर आपसे बात हुई और उधर एक दोस्त से मुलाकात हुई. टोपिक एक ही था- सेक्स और धर्म. फिलहाल यूरोप में हूँ. डेवेलोपिंग देशों से आये लोग एक दूसरे से दोस्ती करना बेहतर समझते हैं- पर यह एक अलग विषय होगा. उसी दिन उस मित्र ने ज़िक्र किया कि वह चर्च गयी थी, और पादरी ने सेक्स के बारे में व्याख्यान दिया (मैं अभी पादरी और पास्टर - और उनके कार्यक्रमों के लिए प्रयोग किये जाने वाले शब्दों से अपरिचित हूँ!)..घूम फिर कर दो घंटे तक की इस बात में ध्यान इस बात पर दिया गया था, कि हमें सेक्स को कोई अलग चीज न मानकर, ऐसा कुछ समझना चाहिए- जो हमारे जीवन का ही एक अवयव है. मूल रूप से तब जब आप किसी के साथ अच्छा समय बिता रहे हों तो सेक्स को अलग रखने का कोई फायदा नहीं है.
    मैं भारत और यूरोप में कोई तुलना नहीं करना चाहता. लेकिन कुछ चीजें हमें सीखनी चाहिए.

    दूसरे राम तो वनवास भी सीता के साथ गए थे, इतनी आसानी से राम या सेक्स की इच्छा रखने वाला पति दो अलग केतागोरी कैसे बनायीं जा सकती है. एक और बात कृष्ण का ज़िक्र भी तो होना चाहिए कभी-कभार, ये तो बड़ी बेढब बात हुई कि पूरा ध्यान एक भगवान पर ही लगा दिया गया है, कृष्ण के सप्पोर्टर न ही कम हैं, बल्कि दुनिया भर में राम से ज्यादा ही होंगे, दूसरे कृष्ण थोडा open-minded लगते हैं. ज़िक्र तो उनका होना चाहिए. राम की फंतासी से बाहर आने पर टीआरपी बढ़ सकेगी, या शायद मैं आदर्शवादी बनकर सोच रहा हूँ?!

     

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