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अंग्रेजी में लद्धड हैं मोदी

Posted On 2:42 pm by विनीत कुमार |

एक ठीक-ठाक समझदार आदमी जब बाजार जाता है तो वही खरीद कर लाता है जिसकी उसे जरुररत होती है। जरुरत है आलू की तो चीकू नहीं खरीदता। लेकिन मीडिया में समझदार आदमी भी गच्चा खा जाता है जैसे अभी दो दिन पहले गच्चा खा गए अपने डेविल्स एडवोकेट के तेजतर्रार एंकर करन थापर।
करन पिछले नौ-दस महीने से देश के सबसे सफल मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी(गुजरात) का इंटरव्यू लेने की कसरत में जुटे थे। दिसम्बर-जनवरी से ही मान-मनौअल चल रहा था कि दे दीजिए, आपसे ये नहीं पूछेंगे, वो ही पूछेंगे और अंत में मोदी रावण जलाने के दो दिन पहले सीएनएन आइबीएन की स्क्रीन पर अवतरित हुए। लेकिन करन के नौ-दस महीने की तैयारी पर मोदी ने साढ़े चार मिनट में मट्ठा घोल दिया, चार मिनट बोलने पर ही पानी की तलब हुई और पानी पीकर एकदम से बोले...न, अपनी दोस्ती बनी रहे, बस। करन पूछ रहे थे गुजरात के लिए आपने जनता से माफी मांगी. मोदी ने कहा हां. करन ने कहा एक बार फिर दुहराएंगे...मोदी का जबाब था हमें जो भी कहना था उसी समय बोल दिया। मतलब साफ था कि चैनल को जितनी मर्जी हो उतनी बार लूप चलाए, रीटेक ले, नेता आदमी स्टेटमेंट बार-बार नहीं दोहराता, बदल भले दे। मोदी ने भी वैसा ही किया।....करन कहते रह गए......मोदीजी, मोदीजी, लेकिन बिदक चुके मोदी को और रथ पर चढ़ चुके आडवाणी को भला कौन रोक सकता है, सो वे नहीं रुके।
अब देखिए, चैनल को कितनी मशक्कत करनी पड़ी होगी, इस इक्सक्यूलिसीव इंटरव्यू के लिए, लाखों का खर्चा आया होगा, कैमरायूनिट, गाडी भाड़ा वगैरह...वगैरह। लेकिन न्यूज के नाम पर साढे चार मिनट का मटेरियल, जिसमें 20-25 सेकेंड मोदीजी के पानी पीने में ही चला गया। तो क्या बाकी के समय में स्क्रीन को ब्लैक जाने दे। ऐसे कैसे हो सकता है, पैसा लगा है भइया, टीआरपी का मामला है, अब जो है उसी से मसाला निकालना है भाई...सो मसाला निकल भी आया।शाम को सीएनएन के भतीजे IBN7 पर आ गया मसाला डंके की चोट पर। अरे खबर हर कीमत पर जब बोला है तो दर्शकों से चीट थोडे ही करनी है और फिर इसको लगा डाला तो लाइफ झिंगा ला ला.... लगाकर जो बैठे हैं उनकी झंड थोडे ही करनी है। सो सीएनएन की तुरही IBN7 पर डंके में कन्वर्ट हो गयी, जिसमें दो कौडी का माल नहीं था उसे हॉट रेसेपी बना दिया, भइया इसे कहते हैं मीडिया की अक्लमंदी। एंकर और भुक्तभोगी करन लग गए लाइव ।

अविनाश भाई ने लिखा मोहल्ला पर कि क्यों असहज हुए मोदी। यही सवाल एंकर ने करन से पूछा तो करन ने बताया कि हो सकता है मोदी अंग्रेजी के कारण ऐसा हो गए। एफ.एम पर एक एड आता है...अंग्रेजी तो आती है लेकिन साले झिझक मार जाती है। यहां उल्टा हो गया। झिझक तो नहीं है लेकिन एक घड़ी के लिए करन को जरुर लगा होगा कि इंटरव्यू से बढ़िया रहता साक्षातकार करवाना. बंदा भाषा को लेकर लसक तो नहीं जाता, कहां तो न्यूज बनाने आए थे कि गुजरात दंगा नहीं जेनोसाइड, मोदी उस दौरान तटस्थ नहीं थे....वगैरह.. लेकिन न्यूज क्या बनीअंग्रेजी में लद्धड हैं मोदी। क्या करोगे, अब इसी को खपाओ।कुछ पानी पीने पर भी बात हो सकती है कि जब भी आप परेशानी महसूस करने लगें, मोदीजी की तरह बिना हिचक के मांगकर पानी पिएं, राहत मिलेगी. अंग्रेजी चैनलों को नसीहत मिलेगी कि भइया कसम खाकर मत बैठो कि सब इंगलिस में ही पूछेंगे और दिखाएंगै, मेन मुद्दा है मसाला का कि जैसे मिल जाए। यहां हिन्दी प्रेमियों को थोड़ा खुश होने का भी स्पेस है कि वे इंगलिसवालों को हिन्दी की तरफ लौटने के लिए मजबूर कर सकते ।
अच्छा, मीडिया में ये पहली दफा नहीं हुआ है कि गए थे, बाल सेट करवाने, चेहरा चमकाने और आए माथा मुड़ाकर।तुर्कमान गेट पर एक बंदा गया था शिक्षा जगत में चल रहे सेक्स रैकेट का खुलासा करने और आतंकवादी का ठप्पा लगवा लिया, फर्जीगिरी में फंस गया। न्यूज लेने गया था, आपही न्यूज बन गया। चैनल हेड को कहना पड़ गया कि हमारे रिपोर्टर ने हमें डार्क में रखा। अब चैनल की कमिटमेंट के मुताबिक- खबर हमारी फैसला आपका, जनता सोच रही है कि जिस चैनल का रिपोर्टर अपने बॉस को डार्क में रख रहा है वो चैनल तो पूरे देश को और हमको भी डार्क में रखेगा। लो भाई गए थे जिप दि ट्रूथ करने अपनी जिप और जुबान बंद करनी पड़
यही हाल हुआ देश के सबसे तेज चैनल के साथ। चैनल लालूजी से सिर्फ इतना जानना चाह रहा है कि आपने भारी घाटे की रेल को मुनाफे की रेल यानि लालू की रेल में कैसे कन्वर्ट कर दिया। चैनल को इसी पर खेलना था..तो उल्टे लालू ने पूछ दिया कि ढंडा में इ बच्चा सबको काहे बैठाए हो और डीयू कैम्पस के सबसे इन्टल बंदो से पूछ डाला, आने के लिए चैनल ने पइसा दिया है का। इ लो न्यूज कहां से कहां पहुंच गयी। इसको कहते हैं कि खाटी दही की हांडी में चूहे का मुत देना।...सो वही होता रहता है।लेकिन इतनी मेहनत से जमायी दही को फेंक तो नहीं देंगे, कढ़ी के काम आएगी।...तो न्यूज का बड़ा हिस्सा कढ़ी है..झालदार, मसालेदार। अच्छा, घर में कुछ उल्टा-पुल्टा खरीद लाए और दानी किस्म के नहीं हैं, फ्रीज नहीं है तो माल सड़ जाएगा। खबरों की दुनिया में कुछ भी बेकार नहीं जाता, सड़ता नहीं है क्योंकि यहां खाने और पचाने वालों की आबादी करोडों में है।...
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2 Response to 'अंग्रेजी में लद्धड हैं मोदी'
  1. राकेश
    http://taanabaana.blogspot.com/2007/10/blog-post_22.html?showComment=1193117460000#c7756903901509379768'> 23 अक्तूबर 2007 को 11:01 am

    बहुत अच्छा लिखा विनीत भाई. बड़े भाई थापर और ऐसे और थापड़ों को मोदी-लालू टाइप नेता हमेशा ही घुमा देते हैं, पर भाई लोग बूझने को तैयार हो तब न!

    बहुत बढिया. मज़ा आ गया.

     

  2. shekhar
    http://taanabaana.blogspot.com/2007/10/blog-post_22.html?showComment=1193167800000#c5643743607588957921'> 24 अक्तूबर 2007 को 1:00 am

    Wah vineet bhai kya lekh likha hai aapnei...Ladies wala....

    Ravish Bisht
    Reporter Sports
    Live India

     

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