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चैनल आएंगे
तुम्हारी तकलीफों, संघर्षों,गुस्से के साथ नजर आएंगे
हां में हां मिलाएंगे
सत्ता,सरकार,प्रशासन को
कटघरे में घसीटेंगे
एनफ इज एनफ और
वी वॉन्ट जस्टिस लिखे पोस्टर को
लगातार जूम इन करके दिखाएंगे
फिर खोजेंगे कुछ फोटोजेनिक चेहरे
जिनके बीच खपा सकें
चड्डी,डियो, नैन मट्टका बाइक के विज्ञापन

फिर तुम्हारे मुंह के आगे रखेंगे माइक
जिनके लोगो होंगे मेरी आंखों के सामने
तुम जज्बात में अपनी बात कहती जाओगी
मुठ्ठी तन जाएगी तुम्हारी और गर्दन की
हल्की हरी नसें साफ उभर आएगी
तुम हम मर्दों से नफरत के एक के बाद
एक शब्द बोलोगी
हममे मे से कुछ अपने हिस्से की गाली, कठोर शब्द चुनकर
भावनाओं में घोलकर मुलायम और हल्का करने की कोशिश करेंगे.

मोतिहारी में बैठी तुम्हारी मां देख-सुन रही होगी तुम्हारी ये बाइट
बलिया में पापा को भीतर ही भीतर गर्व हो रहा होगा.
मुरैनावाली मौसी निक्कू को तुम्हारे जैसा बनाना चाह रही होगी देखकर
मिर्चपुर की चाची के आंखों में आंसू झलक पड़े होंगे.
काश ! सुमन को पिशाचों ने जिंदा न जलाया होता तो
इसी की तरह बोल रही होती टीवी पर मेरी भी बेटी.

तुम्हारा टीवी पर बोलना अच्छा लगता है मुझे
अपनी ही जमात के खिलाफ सुनकर.
अपने भीतर सांस लेती एक स्त्री के नजरअंदाज किए जाने पर
अफसोस नहीं होता.
नहीं लगता कि जिस मर्द के खिलाफ तुम बोल रही हो
उसका एक हिस्सा एक स्त्री के खिलाफ भी हो जाना है.
तो भी, मैं तुम्हें कुछ नहीं कहता हूं, टोकूंगा भी नहीं कभी
नसीहतें देना सामंती सोच को बारीक पीसकर पेश करना है

तो भी, एक बात कहूं, नसीहत नहीं, बस अपील
तुम टीवी की इस अदा पर कभी फिदा मत हो जाना
तुम इसके न रहने पर ऐसी ही बोलती रहना
क्योंकि यहां तो ढलते हुए तुम्हारे आंसू, उफनता गुस्सा
तनी मुठ्ठी और हल्की हरी नसें सबके सब
बस एक ही चीज बन जाती है- पैकेज.
टीआरपी, रायवलरी, सेलेबुल एलीमेंट
का एक ऐसा जाल
जिसके बीच तुम्हारे आंसू सूखकर एक हल्की रेखा रह जाएगी
तुम्हारा गुस्सा भस्म होकर गर्दा-धूल बनकर उड़ जाएंगे
तनी हुई मुठ्ठियों में कंडोम के पैकेट,प्रेग्नेंसी मशीन थमाकर
सबसे आजाद करार दिए जाने का खुला खेल होगा
हल्की हरी नसें बदल जाएगी लैपटॉप की एक और खूबसूरत रंग में..
डियो,लैपटॉप,चड्डी,शेविंगक्रीम के बीच
टेस्ट चेंजर के रुप में एक दूसरी पैकेज
तुम्हें चैनल का विज्ञापन भर नहीं होना है न.
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2 Response to 'चैनल, पैकेज और इन सबके बीच तुम्हारा होना'
  1. Dipti
    http://taanabaana.blogspot.com/2013/01/blog-post_3.html?showComment=1357199699805#c1151109996958051317'> 3 जनवरी 2013 को 1:24 pm

    यही तो सबसे बड़ी समस्या है। महिलाओं को उत्पाद समझना किसी को बुरा ही नहीं लगता है।

     

  2. mr.ghatak
    http://taanabaana.blogspot.com/2013/01/blog-post_3.html?showComment=1357206589259#c815429098392000164'> 3 जनवरी 2013 को 3:19 pm

    at the beginning I thought whats this guy is saying .. but while read further it sense me deep and I appreciate the thought process behind this..

     

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