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लव यू डियर..मिस्सिंग यू एलॉट. रोज की तरह देर रात आज फिर उसका मैसेज आया. मन किया आज उसे फोन करके झाड लगाउं- अबे बत्तख. तू ये क्या रोज-रोज ऐसे सेंटी मैसेज करता है. मेरा फोन सिक्रेट फ्री है,कोई भी उठाकर टीप-टाप करने लग जाता है. मेरे दोस्त पढ़ेंगे ऐसे मैसेज तो पता है क्या समझेंगे..मैं फोन करके ये सब कहता कि इसके पहले ही उसका फोन आ गया-
क्या कर रहे हो, सोए नहीं अभी तक ? नहीं, तेरे इस मर मिटनेवाले मैसेज का इंतजार कर रहा था. चिरकुट, एक बात बता- तू जब मैसेज सेंड पर जाता है तो पता तो होता है न किसी दोस्त को भेज रहा है ? हां डियर, खूब पता होता है और भेजते समय अफसोस भी होता है कि आखिर में आकार लगा होता तो तेरी आंचल की जिंदगी भर गुलामी करता.. तू जो परसों मेथी का पराठा खिलाया न, वो गया तो पेट में लेकिन स्वाद एकदम दिमाग पर चढ़ गया, यार तेरी बहुत याद आती है..मुझे समझ नहीं आया, अब इसे क्या कहूं ? चल,रात बहुत हो गई है..सो जा. कल सुबह उठकर तुझे फिर अमेरिका को मजबूत करने जाना है और मुझे भी अमेरिका की नीतियों को गरिआने के लिए मजबूत होकर जाना है.. नहीं,सुन न.एक बात सुन न. तू हमेशा इतनी जल्दी में क्यों रहता है,जानते हो...मुझे कुछ नहीं सुनना है, तू सो जा.

एक बात बोलूं, जब तुझे हमें इसी तरह दुत्कारना था तो मेरी दिन-रात काउंसलिंग करके जमालपुर से दिल्ली क्यों बुला लिया ? और स्साला उ गुडगांव की उतनी बड़ी कंपनी का बॉस हम कम्प्यूटर सेंटर चलानेवाले में पता नहीं क्या देख लिया कि कहा- डन. कल से ज्वायन कर लें आप. अच्छा था न हम छोटे शहर में रहते थे. जो भी सीखने आता-सर और भैया बोलता था. ऐसा नहीं था कि हुआं सुदर लड़की नहीं थी और हमको पसंद नहीं करती थी. एक से एक थी लेकिन मजाल है कि कुछ उल्टा-सीधा ख्याल आया हो. जानते हो, यहां जब शाम को कैब से उतरकर साउथ एक्स की गली में घुसते हैं न तो चौतरफी यही मिस्स यू, लव यू..कैसे हमारे घर के सामवे की पीपल पर शाम में हजारों कबूतर एक की भाषा बोलते हुए लौटते थे. हम यहां ठहरे बंड़ा. सब कहता है- गर्लफ्रैंड बनाना सिरदर्द मोल लेना है और बहुत खर्चीला काम है..औ फिर जब तब नहीं किए कुछ तो अब इस उमर में क्या होगा हमसे अफेयर-तफेयर. लेकिन सबको लव यू मिस्सिंग यू बोलते देखते हैं खोखवाले कमरे में तो लगता है- मेरा भी कोई हो जिसको हम इ सब बोल सकें. बुरा मत मानना डियर, इसीलिए तुमको ऐसा मैसेज कर देते हैं. आगे से नहीं करेंगे.

हैलो,हैलो..तू सचमुच सो गया क्या ? न न,बोल न.सुन रहा हूं. हां तो बस इसलिए इ सब लिख देते हैं, इसका गलत अर्थ मत लगाना. इमोशनल हो जाते हैं तुम एकदम लड़की जैसा ट्रीट करते हो न तो लगता ही नहीं कि किसी लड़का दोस्त के यहां गए थे. लेकिन एक बात और कहें-

ए स्साला तुम्हारा अंग्रेजी और इस अंग्रेजी को समझनेवाला दोस्त बंडल है. ऐसा थोड़े होता है कि लव यू का मतलब सिर्फ वही होता है जो एक औरत-मर्द के बीच होता है. हम आपस में नहीं बोल सकते क्या ? अब देखो तो हिन्दी में प्यार मतलब मां से, भाई से,बच्चे से और प्रेमिका से सबसे होता है न. इ भाषा बहुत तंग दिल की है यार..है न ( लंगोटिया लप्रेक)
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1 Response to 'लव का मतलब सिर्फ स्त्री-पुरुष प्रेम थोड़े हैः एक लंगोटिया लप्रेक'
  1. अनूप शुक्ल
    http://taanabaana.blogspot.com/2013/01/blog-post_26.html?showComment=1359166840335#c4484351316569829299'> 26 जनवरी 2013 को 7:50 am

    सही बताइस दोस्त। लव यू कह देते हैं विनीत बाबू। आखिर में आकार लगा होता तो हम त न बोलते लेकिन न जाने कित्ते लव यू फ़हरा रहे होते यहां पीपल के पेड़ में कपड़े की चिंदियो जैसे। :)

     

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