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जल्द ही हिन्दी का भविष्य और अलग-अलग माध्यमों की हिन्दी को लेकर एक किताब प्रकाशित की जानी है। मुझे इस किताब के लिए हिन्दी ब्लॉगिंग पर एक लेख लिखने के लिए कहा गया है। ब्लॉगिंग को लेकर मेरी जो भी और जैसी भी समझ और अनुभव है,जिनलोगों को पढ़ता आया हूं,उनकी ब्लॉग सामग्री को रेफरेंस के तौर पर इस्तेमाल तो करुंगा ही। लेकिन मैं चाहता हूं कि इस बीच आप हिन्दी ब्लॉगिंग की स्थिति को लेकर क्या सोचते हैं,आपकी इस मामले में क्या राय है,हमसे शेयर करें। मैं अपनी बात रखने,पोस्टों के रेफरेंस शामिल करने के साथ-साथ आपकी बातें भी जोड़ता चला जाउंगा। कोशिश है कि हिन्दी ब्लॉगिंग पर एक बेहतर लेख तैयार हो जाए।

फेसबुक पर मैंने दो-तीन बार अनुरोध किया है। बज पर भी अपील की है कि आप अपनी राय मुझे दो-तीन के भीतर भेजें। रविरतलामी,रवीश कुमार,अनूप शुक्ल,यशवंत सिंह गिरीन्द्रनाथ झा,रचना सिंह,सुजाता,नीलिमा,प्रमोद रंजन,अजय कुमार झा,प्रशांत प्रियदर्शी और अफलातून की प्रतिक्रियाएं आयी हैं। इनमें से रविरतलामी,मुंबई से रवि श्रीवास्तव,जयपुर से नीलिमा सुखेजा और गिरीन्द्र ने तो लिखकर भेज दिया है। लेकिन बाकी के लोगों ने कुछ इन्क्वायरी के साथ एक-दो दिनों की अतिरिक्त समय की मांग की है। मुझे लगा कि अलग से लिखने के नाम पर शायद लोग कोताही कर जाएं इसलिए विज्ञापननुमा अंदाज में मैंने दो बातें लिखीं। एक तो ये कि आप अपनी बात सौ-सवा सौ में ही लिखकर भेज दें औऱ दूसरी बात कि जितनी देर में आप फेसबुक पर अपनी स्टेटस बदलते हैं,कमेंट करते हैं,उतनी देर में आप अपनी राय मुझे भेज सकते हैं। इन दोनों बातों से मेरा इरादा आपके लिए कोई शब्द सीमा बांधना नहीं है,आप अपनी मर्जी से जितना चाहें लिखें।

फेसबुक,बज और पर्सनल मेल के जरिए मैंने लोगों से अपील की है। उम्मीद है कि लोग रिस्पांड करेंगे। लेकिन ब्लॉग की दुनिया के कई संजीदा और सक्रिय लोगों तक मेरी ये अपील नहीं पहुंच पायी होगी,इसलिए पोस्ट के जरिए राय मांगने की जरुरत पड़ी। उम्मीद है कि आप निराश नहीं करेंगे।
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8 Response to 'हिन्दी ब्लॉगिंग पर अपनी राय दें,प्लीज'
  1. कृष्ण मुरारी प्रसाद
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/04/blog-post_09.html?showComment=1270800671125#c7307921633846546218'> 9 अप्रैल 2010 को 1:41 pm

    विचार अच्छा है...

     

  2. जितेन्द़ भगत
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/04/blog-post_09.html?showComment=1270807255838#c226395273039825532'> 9 अप्रैल 2010 को 3:30 pm

    ब्‍लॉग को समझने-समझाने की दि‍शा में यह पुस्‍तक महत्‍वपूर्ण साबित होगी। मेरी शुभकामनाऍं।

     

  3. अविनाश वाचस्पति
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/04/blog-post_09.html?showComment=1270809708767#c4684252018439957489'> 9 अप्रैल 2010 को 4:11 pm

    वैसे एक बात तो बतलायें कि हिन्‍दी ब्‍लॉग कैसे गिने जायें और उससे जुड़े ब्‍लॉगर ? ब्‍लॉगस्‍पाट, वर्डप्रेस जैसे प्लेटफार्म और अखबारों ने भी ब्‍लॉग शुरू कर दिए हैं अपनी अपनी साइटों में इसके अतिरिक्‍त भी बहुत सारे हैं। अब गिनने का कोई तरीका भी तो बतलाइये। और उनमें भी टॉप टैन ब्‍लॉग और टॉप टैन ब्‍लागर। और इनमें भी सक्रिय, निष्क्रिय वगैरह श्रेणियां भी तो हैं।
    वैसे आपकी यह अपील पहली बार ही देख रहा हूं। इससे पहले तो दिखाई नहीं दी कहीं भी।

     

  4. Arvind Mishra
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/04/blog-post_09.html?showComment=1270822587680#c8977665218746240638'> 9 अप्रैल 2010 को 7:46 pm

    मुझे लगता है पर्याप्त स्वनामधन्य लोगों के विचार आप तक पहुँच गए हैं और आपका आपना तो है ही ..इतिहास बन गया और की अपेक्षा बेमानी ही है !

     

  5. tarannum
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/04/blog-post_09.html?showComment=1270822684936#c3311895006316132762'> 9 अप्रैल 2010 को 7:48 pm

    you really want to know about it than here are few example
    हमारे ख्याल से आज से तीन दशक पहले गांवों में छूआ-छूत की तूती बोलती थी। ऐसे में किसी हरिजन के घर पर खाना खाने के बारे में कोई सोच नहीं सकता था। लेकिन हमने
    so he made the world better by eating with "HARIZAAN"

    another fellow

    अब इस दौर में भला औरत ... तो औरत ही है वह भी पीछे क्यों रहे .... उसे पीछे रहने की जरुरत भी क्या है ... अगर पीछे रह जायेगी तो "बहन जी" ..... बैकवर्ड ... या देहाती .... जैसे कांटों की तरह चुभने वाले "कमेंट" सुन सुन कर पानी पानी हो जायेगी ..... आज की औरत भी समझदार, चालाक व बुद्धिमान हो गई है वह जानती है .... पुरुषों को कैसे आकर्षित किया जाए ..... फिर भला क्यों न खुद ही अपने कपडों व जिस्म की मादक अदाओं से पुरुषों को अपना भक्त बना लें .... फ़िर भला भक्त और भगवान का तो चोली-दामन का साथ रहता है अर्थात भक्त के बिना भगवान नहीं और भगवान के बिना भक्त का कोई अस्तित्व नहीं ... जब चोली-दामन का साथ है ही, तो पर्दा, किस बात का पर्दा ..... पर्दा नहीं, तो क्या देखना और क्या दिखाना .... जिसमें तेरी खुशी उसमें ही मेरी खुशी .... पुरुष देख के खुश, तो महिला दिखा के खुश ......

    .... ये सच में "कडुवा सच" है औरत के पहने टाईट जींस-टी शर्ट से झलकते जिस्म, मिनी स्कर्ट में छलकती जांघों, अधखुले स्तनों, खुली पीठ व मादक अदाओं को देख कर ....... पुरुष सडक पर, बाजार में, समारोहों में, कार्यालयों में तथा आस-पडोस में आहें भरते देखा गया है.... और तो और कुछ लोगों का तो दिन का चैन व रातों की नींद ..... ये बिलकुल आम बात है ....... अब इस दौर में भला औरत क्यों ..... !!!

    look how many intelligent people get going in blog and
    what people says

    बहुत सुंदर और विचारनीय आलेख.....


    another one is
    दूसरा श्री रणधीर सिंह सुमन। खरे जी और सुमन जी की सक्रियता ब्लॉग जगत में किसी से छिपी नहीं है। ये दोनों ही ब्लॉगर सामाजिक विषयों पर अपने धुंआधार लेखन के लिए जाने जाते हैं।

    and how mr suman do this?
    by saying "NICE"

    YOU STILL FEEL YOU SHOULD WRITE A BOOK .
    and for god sake dont moderate this one as these people do.

     

  6. रचना
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/04/blog-post_09.html?showComment=1270826064546#c5011728815373482521'> 9 अप्रैल 2010 को 8:44 pm

    Hindi Bloging is nothing but socail networking . Here people have no issues to write rather they want to write on just each other . There is no future of hindi bloging till the time bloggers understand that they have to form a strong force just int he virtual world so that there are no clashes . In hindi bloging there is more pronographical descriptions on various blogs int he name of science . Hindi bloggers still belive that blogger word is masculin and they have to find a feminin word for it .
    Woman bloggers are trashed on personla fronts instead of trashing the articles . More than 90% hindi male bloggers believe that woman are just born to reproduce and that they should be fully clothed so that the man dont get provokeed.
    Comments come on the personal rapo rather then on the content of the post . Hindi bloging is stagnating because people dont blog in virtual world they want to talk and chat in real world and just write appreciation of each other .

     

  7. Nikhil Srivastava
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/04/blog-post_09.html?showComment=1270849073057#c1823466163699554233'> 10 अप्रैल 2010 को 3:07 am

    मैंने मेल किया था आपको. आशा करता हूँ मिल गया होगा. कोई कमी तो जरूर बताएं. मैंने शब्द कम लिखे हैं. बाकि मेल में देखकर निर्देश दें.

     

  8. cg4bhadas.com
    http://taanabaana.blogspot.com/2010/04/blog-post_09.html?showComment=1270914573738#c1057075394076443613'> 10 अप्रैल 2010 को 9:19 pm

    विनीत कुमार जी... मुझे आज तक एक बात समझ नहीं आयी पुरे ब्लाग पढ़े , लेकिन आपके जैसा विश्लेषक नहीं देखा बावजूद इसके आपके ब्लाग में महज ७ - ८ या १० ही टिपण्णी होती है ऐसा क्यों जबकि अन्य ब्लागों में ३० की संख्या में टिपण्णी कर्ता भी होते है . जंहा तक मेरी जानकारी में है आप सिर्फ ब्लाग में नहीं वरन जीवन में भी उन्ही सब बातो का आचारण करते है जिसकी झलक आपके लेखनी में दिखाई पड़ती है तो फिर ये लोगो के सर के ऊपर से कैसे चले जाती है .. सोचिये जरा .....

     

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