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हां पापा बोलिए न, आपने अभी मिस्ड कॉल दिया था. नहीं,वो गलती से दब गया होगा. अरे, वो मां बतियाना चाह रही थी,बोली लगाइए तो विनीत को. वो राजेश पूछ रहा था कि पैर का दर्द कैसा है, कम हुआ कि नहीं. इस तरह किसी न किसी का नाम और बहाने लेकर पापा रोज फोन करते हैं. भरी उदास दुपहरी में पापा का फोन आना,ज्यादातर मिस्ड कॉल अच्छा लगता है बल्कि दो बजे तक मिस्ड कॉल न आए तो मुझे बेचैनी से होने लगती है. ऐसा पापा के साथ मेरा पिछले दो साल का अफेयर चल रहा है. शुरु-शुरु में तो बहुत औपचारिक रहता था फोन पर लेकिन अगर रोज बातें होने लगे तो पापा कब तक सिर्फ पापा रह सकते हैं.

इन दोनों कैडबरी का एक विज्ञापन आ रहा है जिसमें बच्चे के डैडी उसके साथ होमवर्क भी करते हैं,खेलते भी हैं, फुल मस्ती करते और वो सबकुछ करते हैं जो रजनीकांत कर सकता है. करीब ढाई हजार किलोमीटर की दूरी के बीच पापा हमसे और हम पापा से जिस भी तरह की बातें कर सकते हैं, अब करते हैं. ऐसे में वो जैसे ही कहते हैं- मां बतियाना चाह रही है तो मैं पलटकर पूछता हूं- और पापा आप, आप नहीं बतियाना चाहते हैं ? :)


दो साल के इस अफेयर में पापा अभी तक ये "एक्सेप्ट" नहीं कर पा रहे हैं कि उनका रोज हमसे बात करने का मन होता है इसलिए फोन करते हैं. इसे हम एक बाप की आदिम इगो के बजाय एक गर्फफ्रैंड की शैतानी कहें तो क्या गलत होगा कि वो सबकुछ कहती है लेकिन वो ये मानने के लिए तैयार नहीं होती कि वो किसी लड़के से प्यार भी करती है. ऐसे में बाप और गर्लफ्रैंड एक-दूसरे के बहुत करीब जान पड़ते हैं. मां अब बहुत मजे लेने लगी है. बड़ा आजकल छोटका बेटा से हंसी-ठठ्ठा होता है, बुढ़ारी में अक्किल आया कि इहौ एगो बेटा है औ इससे भी बोलना-बतियाना चाहिए. पापा तब भी इस सच को नकारते हैं- पगला गई हो, उ तो राजेश बोला था पूछने कि पैर का दर्द कैसा है तो फोन कर दिए. क्या पापा, आप तो विनीत को फोन किए थे, बताया होगा कब आ रहा है टाटा, मेरी दीदी पूछती है ? नहीं हमसे कहां बात हुई. पापा साफ झूठ बोल जाते हैं.

पापा का रोज फोन करना और उसे किसी न किसी तरह नकारना उतना ही बड़ा सच है जैसे इस देश की लाखों लड़कियों का किसी की बेटी,किसी की बहन होने से कहीं ज्यादा मजबूती से किसी की गर्लफ्रैंड का होना और उसे नकारना. इस खुले समाज में भी उसका ऐसा स्वीकार करना. मैं अक्सर सोचता हूं कि आखिर पापा को दिक्कत क्या है ये बताने में कि मेरी उनसे रोज बात होती है? कहीं उन्हें इस बात का डर तो नहीं कि सरेआम दुनिया को पता चल जाएगा कि बाप के सीने में कोई दिल है जिसका पिछले कुछ सालों से तेजी धड़कना शुरु हो गया है,खासकर अपने बेटे के लिए. या फिर एक सनातन व्यवस्था के चरमरा जाने का खतरा व्यापता है उन्हें कि बाप का काम ही है बेटे के प्रति सख्ती बरतना, इतनी सख्ती कि जब डांटा जाए तो उसके अगले दो-तीन घंटे तक अलग से बाथरुम जाने की जरुरत न पड़े ?

शायद उन्हें इस बात की झिझक हमेशा रहती होगी कि जिस औरत के सामने हम उसके बच्चे को सालों से हड़काते रहे, अब उसी से हेल-मेल से फोन करेंगे तो बड़ा मजाक उड़ाएगी और कहेगी- हम कहते थे कि जो अपना बाल-बच्चा के दुत्कारता है, उ नरक भोगता है..अब देखो बुढ़ारी में नरक भोगने का डर सताने लगा तो कैसे मीठ्ठा-मीठ्ठा बतियाते हैं...लेकिन मुझे आप इस स्वार्थ से घिरे शख्स नहीं लगते. जिस इंसान ने जिंदगी में कभी अगरबत्ती तक न जलायी हो, दूकान की दीया-बत्ती हमेशा छोटू-राजू से जलवायी हो, उन्हें भला कौन सा नरक और स्वर्ग का चक्कर होगा. वो सचमुच मेरे साथ अफेयर में पड़ चुके हैं बुरी तरह..छोड़ों न, सीसीडी ले जाने कहती है, पीवीआर ले जाकर पैसे खर्च कराती है लेकिन प्यार भी तो करती है..मैं पापा से ठीक इसी तरह सोचकर प्यार करने लगा हूं. सम शॉर्ट ऑफ एक्सट्रीम क्रश.

अबकी बार मार्च में चार दिनों के लिए घर जाना हुआ. जमाने बाद घर गया था. लिहाजा तीनों दीदी अपने प्यारे-प्यारे बच्चों के साथ मुझसे मिलने आ गयी. घर में मेला सा लग गया. चार कमरे की फ्लैट में लगा बेड लगाने के बजाय लोहे की रैक खरीद ली जाए,चौड़ी बड़ी सी और उसी में गद्दे डाल दिए जाएं. संत जेवियर्स कॉलेज,रॉची के हॉस्टल में इसी तरह की व्यवस्था है. एक कमरे में नौ से बारह लोग इसी तरह रहते हैं. खैर, नौ बजते ही कहने लगते- तुम मेरे ही पलंग पर सो जाना. बहुत बड़ा है. मैं उस पलंग पर दिनभर में पचहत्तर बार बैठ चुका होता हूं और उसकी साइज मेरी आंखों में बुरी तरह धंस चुकी होती है फिर भी पापा बताते हैं बहुत जगह है, बहुत बड़ा है..रात में उनके साथ लेटता.

 आपको नींद आ रही है पापा. पापा को जबरदस्त नींद आ रही होती थी लेकिन अचानक से हुचककर बोलते- नहीं, ऐसे ही आंख बंद किए हैं. मैं कहता, मुझे भी नहीं आ रही है. फेसबुकिआने के वक्त भला कहां नींद आती. घर में मेहनतकश लोगों का जमावड़ा था. दो साल के क्षितिज से लेकर पापा तक की फिक्स रुटीन थी. सब दिनभर दूकान और चूल्हा-चाकी से थके होते. बिस्तर पर जाते ही नींद आ जाती. मैं रात में अकेले जहां और जिस भी कोने से भी फुफुर-फुसुर टॉय-ठांय की आवाज सुनता, सक्रिय हो जाता. कोई न कोई मिल ही जाते जिससे भसड़ शुरु की जा सकती थी. इस बार जो पापा रात की गप्पों से भड़के रहा करते, मेरे साथ देर रात तक बातें करते रह जाते. चलिए आपको मैं किसान सिनेमा,बिहार शरीफ पर एक पोस्ट सुनाता हूं औऱ मैं मोबाईल से ही शुरु हो जाता. सुबह होने पर दीदी लोग मजे लेने लगती. मां कहती- जेतना इससे चिढ़ते थे, उतना ही इ साध लिया है. मां भीतर से बहुत खुश हुआ करती पापा के इस व्यवहार से.

अबकी बार घर से आते वक्त पापा छोड़ने जाने के लिए पहले से ही तैनात थे. कुछ तो पुरुषोत्तम की जगह राजधानी ने भी उनके लिए सहूलियत बढ़ा दी थी. सुबह छ साढ़े छ बजे की जगह दिन की ट्रेन. सबों ने बारी-बारी से हाय-बाय किया. मां ने उसी सनातनी परंपरा का निर्वाह किया- सौ,पांच सौ के न जाने कितने मुड़े-तुड़े हल्दी बेसन लगे नोट..पापा और आगे तक आए.

 मीडिया, एकेडमिक्स, यूनिवर्सिटी की राजनीति और उठापटक पर अबकी बार उनसे बहुत कुछ शेयर किया था मैंने. छूटते वक्त उन्होंने जोर देकर कहा- जो करने गए हो, वही करो. एतना लंझाड़ छोड़कर निकले हो तो अपने मन से कम्परमाइज मत करना. किसी के कहने पर कुछ मत लिखो. तिवारीजी कह रहे थे कि आपका लड़का लिखता है त उसमें धार रहता. उसको कहिएगा कि इ बनाए रक्खे. पापा ने तिवारीजी को खासतौर से कोट किया ताकि हम पर कुछ ज्यादा ही असर हो. यहां तो हम गाहक सबको सर,सर करिए रहे हैं,तुम चमचई के फेर में मत पड़ना. अरे कुछ नहीं होगा तो हम तो है ही न. मुझे पहली बार लगा..पापा किसी गर्लफ्रैंड से बहुत आगे का फैसला ले चुके हैं, वो इस दो साल के अफेयर को सचमुच बहुत सीरियसली लेने लगे हैं.

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10 Response to 'डरी हुई गर्लफ्रैंड की तरह रोज फोन करते हैं पापा'
  1. अनूप शुक्ल
    http://taanabaana.blogspot.com/2012/06/blog-post_17.html?showComment=1339925018075#c4219036229913765937'> 17 जून 2012 को 2:53 pm

    बहुत खूब! बहुत प्यारी पोस्ट एकदम लव अफ़ेयर की तरह! :)

     

  2. आनंद
    http://taanabaana.blogspot.com/2012/06/blog-post_17.html?showComment=1339930811667#c5925202822524100777'> 17 जून 2012 को 4:30 pm

    इसे पढ़कर मैं भी अपने पिताजी को मिस करने लगा... बढ़ि‍या लिखा है... हैप्‍पी फादर्स डे।

    - आनंद

     

  3. प्रवीण पाण्डेय
    http://taanabaana.blogspot.com/2012/06/blog-post_17.html?showComment=1339935928957#c3646590514207242492'> 17 जून 2012 को 5:55 pm

    पिता का कुछ कहते कहते रुक जाना, या कहना चाह कर भी कुछ न कहना। स्नेह तो रहता है पर व्यक्त करना कठिन लगता है।

     

  4. निवेदिता श्रीवास्तव
    http://taanabaana.blogspot.com/2012/06/blog-post_17.html?showComment=1339951335515#c749739596350444884'> 17 जून 2012 को 10:12 pm

    भीनी-भीनी भावनाएं ... एकदम से अपने पापा का चेहरा आँखों के सामने जीवंत हो गया ....... बहुत-बहुत शुक्रिया !!!

     

  5. देवेन्द्र पाण्डेय
    http://taanabaana.blogspot.com/2012/06/blog-post_17.html?showComment=1339989548975#c7374468918068713986'> 18 जून 2012 को 8:49 am

    ह्रदयस्पर्शी इस पोस्ट को पढ़कर आनंद आ गया। अनूप जी का आभारी हुआ।

     

  6. आशीष श्रीवास्तव
    http://taanabaana.blogspot.com/2012/06/blog-post_17.html?showComment=1339991074301#c2657302946970726419'> 18 जून 2012 को 9:14 am

    बेहतरीन!

     

  7. संगीता स्वरुप ( गीत )
    http://taanabaana.blogspot.com/2012/06/blog-post_17.html?showComment=1339998824160#c4536231806722274722'> 18 जून 2012 को 11:23 am

    पापा किसी गर्लफ्रैंड से बहुत आगे का फैसला ले चुके हैं, वो इस दो साल के अफेयर को सचमुच बहुत सीरियसली लेने लगे हैं.

    बहुत प्यारी पोस्ट ... पापा के बारे में और उनकी भावनाओं को समझना और लिखना मन को छू गया

     

  8. indianrj
    http://taanabaana.blogspot.com/2012/06/blog-post_17.html?showComment=1340006599099#c3701303869311581637'> 18 जून 2012 को 1:33 pm

    एक अलग ही प्यारा सा रिश्ता बना लिया है विनीतजी आपने तो. ज़ाहिर है आपकी सोच बहुत गहरी रही है इसे लिखते हुए. बहुत-२ बधाई ऐसी सुंदर पोस्ट के लिए.

     

  9. shikha varshney
    http://taanabaana.blogspot.com/2012/06/blog-post_17.html?showComment=1340008863594#c3387863919064896290'> 18 जून 2012 को 2:11 pm

    so... beautiful...

     

  10. पनिहारन
    http://taanabaana.blogspot.com/2012/06/blog-post_17.html?showComment=1341742131643#c3520083700522469867'> 8 जुलाई 2012 को 3:38 pm

    एतना लंझाड़ छोड़कर निकले हो तो अपने मन से कम्परमाइज मत करना...............पिता जी के ये बोल आपकी सफलता का प्रमाणपत्र है।

     

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