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हमारे और रवीश कुमार के बीच आज अगर कोई बूढ़ा-बुजुर्ग आ जाए तो एक बार तो जरुर कहेगा-ये लौंडे तो पहले से ही खत्तम हैं,तुम इन्हें और क्यों बर्बाद कर रहे हो,रवीश? फेसबुक पर रवीश कुमार से जो भी जुड़े हैं,उन्हें पता है कि वो वहां क्या खेल करते हैं। पांच-छः घंटे पर कोई छोटा-सा संदेश चस्पा जाते हैं। इस संदेश की लिपि अंग्रेजी में होती है जबकि बातें खाटी हिन्दी या कभी-कभी उर्दू टच लिए। शायद इसलिए कि ज्यादातक संदेश मोबाइल से भेजी होती है। उसके बाद इस पर कमेंट करनेवाले लोगों के बीच आपाधापी मच जाती है। इसकी बोहनी(शुरुआत)ज्यादातर गिरीन्द्र से होती है। उसके बाद चंडीदत्त शुक्ल,इरशाद अली, सुशील कुमार छौक्कर,साजिद खान और भी दुनियाभर के लोग। पहले मैं फेसबुक को रोजाना नहीं देखता था लेकिन जिस तरह से लोगों ने इसे गर्माना शुरु कर दिया है कि दिनभर में एक-दो बार देखे बिना चैन नहीं पड़ता। रवीश अक्सर दो लाइन लिखकर ब्राइकेट में सस्ता शेर या चीप शायरी लगाकर कंटेट को क्लियर कर देते हैं। बाकी बातों पर तो नहीं लेकिन सस्ता शेर पर मैं कमेंट करने से अपने को रोक नहीं पाता। यहां मैं अक्सर स्त्रीलिंग भाषा का प्रयोग करते हुए कमेंट करता हूं,कुछ-कुछ हिन्दी के आदि कवियों की नकल करते हुए। क्योंकि रवीश सस्ता शेर के नाम पर जो कुछ भी लिखते हैं, उसे पढ़ते हुए पता नहीं क्यों मुझे लगता है कि लड़कियों को इसका जबाब देना चाहिए। मैं उनके वीहॉफ पर जबाब देता हूं। जिस दिन से लड़कियां जबाब देना शुरु कर देगी, मैं स्त्रीलिंग-भाषा का प्रयोग बंद कर दूंगा। कोट-पैंट पहनकर एकरिंग करनेवाले रवीश की ऐसी तस्वीर हमने सिर्फ इसलिए लगायी है कि हम जैसे टटपुंजिए पाठक उन्हें पढ़ते हुए सकपका न जाए। फिलहाल सस्ता शेर और जबाबी कारवाई से गुजरते हुए मजे लें-

1. is shehar me hur baat achhi hoti hai, sachhi mulaaqaaten bhi jhoothi lagteen hain,khat parhne ke baad vo hanstee rahtee hai,jhoothe alfaazo ko sachha samajhtee hai(cheap shayri)

जबाब- पढ़ती हूं अल्फ़ाजों को और हंसती हूं तुम्हारी कोशिशों पर
कि झूठ लिखकर भी तुम सच के एहसास को जिंदा रखना चाहते हो..

2.is shehar me hur baat achhi hoti hai,vo nahee aateen to mulaqaat kisi aur se ho jaatee hai. (Cheap shayari)


जबाब- शहर में आकर तुम मर्द कितने सतर्क हो जाते हो
मोहब्बत में भी बेकअप रखते हो

3.Qatal bhi hum hue aur qaatil bhi kehlaaye,muqadma chalne se pehle, faislaa ho gaya

जबाब- कि जिसने कातिल किया है जिसको और
जो कातिल हुआ है जिससे
वो जमाने को न बताए कभी कि
कातिल होने और करने की सजा क्या होती है।.

4.Is july me sanam, hum baadal ban jaayegaa, barsenge august bhar,phir ghum ho jaayenge.

जबाब- तुमने बहुत देर कर दी मेरे हमदम
हम तो मार्च से ही पसीना बनकर
रिक्शेवालों की पीठ पर बहते रहे
वो हीरामन बन गया
और हम गमछा थमाने लगे

5.Humne dil kisi ka na torha mohabbat me, hur toote dilwaalo ka thikana hai meraa dil

जबाब- hasrat thi ki kabhi mohabbat me na tute kisi ka dil
tute to jud jaayae fir,kabhi kabaadkhana na bane mera dil

6.दुनिया की सारी बेवफाओं से आबाद है मेरी शायरी। रोते हुए आशिकों ने सींचा है मेरी नज़्मों का बागीचा।। cheap shaayri is back

जबाब- दर्द के खाद पड़ते रहे इन नज़्म की जड़ों में
बिना जमाने की खौफ़ के,बेख़ौफ बढ़ता रहा बगीचा

7.Cheap shayari- sitaaro ki tarah jhilmilaane ki zarurat nahee, mere chaand ko itraane ki zarurat nahee, door se hi achhi lagtee ho tum, ghar aane ki zarurat nahee

जबाब- तो फिर तुम भी खिड़की पर ही नजर बनाए रखना
दरवाजे पर की दस्तक सुनने की कोई जरुरत नहीं

8. Ek sms se hee baat ban gayee,baarish se pehle vo aa gayee,mulaqaat ka vaqt kum milaa,jo bhi milaa, kaafi lagaa

जबाब- जिंदगी भर तक मथ्था टेका,मिला नहीं मुझे ईश
बस एक एसएमएस जो किया,डेट पर मिले रवीश
| edit post
7 Response to 'इन लौंडों को क्यों बर्बाद कर रहे हो रवीश'
  1. गिरीन्द्र नाथ झा
    http://taanabaana.blogspot.com/2009/05/blog-post.html?showComment=1241428560000#c8699683600162415582'> 4 मई 2009 को 2:46 pm

    काहे मोर्चा खोल रहे हैं भैया। और ई आरोप काहे कि रवीश शायरी लड़कियों के लिए लिखते हैं। कभी कभी ऊ अलग भी लिखते हैं।

    हमने उन्हें उनके ब्लॉग के जरिए कहा था कि ऊ एकगो कितबिया छपवाएं सस्ती शायरी के नाम से,,गारंटी देता हूं माल खूब बिकेगा।

    वैसे स्पेशल रिपोर्ट में कोर्ट-पेंट-टाई लगाकर आने वाले रवीश की जो फोटू आपेन लगाई है ऊ काफी मजेदार है।

     

  2. अविनाश वाचस्पति
    http://taanabaana.blogspot.com/2009/05/blog-post.html?showComment=1241448840000#c5097805203751633203'> 4 मई 2009 को 8:24 pm

    इसे नाम दिया जा सकता है
    ब्‍लॉग मोर्चा

    (ब्‍लॉग का नाम कस्‍बा सब्‍जी (सस्‍ती) शायरी का प्रस्‍तावित है न पसंद आए तो रद्द माना जाए

    अच्‍छा माना है गिरीन्‍द्र ने
    कभी कभी ऊ अलग भी लिखते हैं
    कभी कभी काहे
    ...

    बिकेगा और पोस्‍ट लगायेंगे तो
    टिप्‍पणियां भी थोक में मिलेंगी
    इतनी कि उड़नतश्‍तरी की तश्‍तरी
    भी नजर नहीं आएगी कहीं।

    फोटो की नीलामी उलामी करने का
    विचार तो नहीं
    कोई तो माला(माल्‍या) मिल ही जाएगी
    दिल की शायरी दिल और दिल्‍ली
    दोनों में रह जाएगी।

     

  3. विजयशंकर चतुर्वेदी
    http://taanabaana.blogspot.com/2009/05/blog-post.html?showComment=1241458920000#c403180668393887919'> 4 मई 2009 को 11:12 pm

    विनीत, ये सब क्या है? कुछ भी हो तुम्हें जीवन में गंभीरता से काम लेना है.

     

  4. इरशाद अली
    http://taanabaana.blogspot.com/2009/05/blog-post.html?showComment=1241506980000#c8391993432932187651'> 5 मई 2009 को 12:33 pm

    तुम तो बुरा मान गए दोस्त!

     

  5. सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
    http://taanabaana.blogspot.com/2009/05/blog-post.html?showComment=1241536980000#c4236344018288176239'> 5 मई 2009 को 8:53 pm

    सही जा रहे हो गुरू...!
    लल्लन टॉप की माफ़िक...:)

     

  6. अनूप शुक्ल
    http://taanabaana.blogspot.com/2009/05/blog-post.html?showComment=1241539560000#c9000733453883249575'> 5 मई 2009 को 9:36 pm

    कल पढ़ी थी पोस्ट। कम भर का मजा कलहैं ले लिये थे। आज रवीश कुमार की शायरी पढ़े और आपके जबाब भी। मजा दुगुना हुआ। फोटो चकाचक है रवीश कुमार की।

     

  7. सुशील कुमार छौक्कर
    http://taanabaana.blogspot.com/2009/05/blog-post.html?showComment=1241697420000#c5524139161811308859'> 7 मई 2009 को 5:27 pm

    विनीत भाई काहे मजे लेते है। वैसे ये फोटो कहाँ से लाए।

     

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