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आपको याद होगा हमने पांच दिन पहले न्यूज एक्सप्रेस के रिपोर्टर नारायण परगईं को लेकर एक पोस्ट प्रकाशित की थी- "मिलिए न्यूज एक्सप्रेस के इस बेहया रिपोर्टर से". इस पोस्ट में हमने उस पीटूसी की वीडियो लिंक सहित स्टिल काटकर लगायी थी जिसमे ये रिपोर्टर एक गरीब,लाचार और अपने से कम उम्र और वजन के दिखनेवाले एक शख्स के कंधे पर बैठकर उत्तराखंड में आी बाढ़ से तबाही को लेकर सरकार की नाकामी की भर्त्सना कर रहा था..वो बता रहा था कि सरकार इस घटना को लेकर संवेदनशील नहीं है..लेकिन ऐसा बोलते और रिपोर्टिंग करते हुए वो ये नहीं समझ पा रहा था कि वो कैमरे के सामने जो कुछ भी कर रहा है और पत्रकारिता के नाम पर दर्शकों के आगे जो परोसने जा रहा है, वो मानवाधिकार का सीधा-सीधा उल्लंघन है..कोई थोड़ी सी भी सख्ती और सतर्कता बरते तो इस पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है. इस वीडियो को फेसबुक पर लोगों द्वारा लगातार साझा किए जाने और पोस्ट लिखकर आलोचना किए जाने का असर हुआ कि चैनल ने इस रिपोर्टर की अपने यहां से छुट्टी कर दी. मतलब ये जनाब अब न्यूज एक्सप्रेस की स्क्रीन पर नजर नहीं आएंगे. मीडियाखबर डॉट कॉम ने इस बात की पुष्टि करते हुए पोस्ट लगायी है- 

गरीब के कंधे पर चढ़कर पीटूसी करने वाले नारायण परगईं की न्यूज़ एक्सप्रेस से छुट्टी


एक तरह से देखें तो चैनल अपने स्तर पर जो सजा दे सकता था, दिया लेकिन उसके निकाले जाने से ऐसे मीडियाकर्मियों की करतूतें खत्म हो जाएगी,इसे लेकर आश्वस्त नहीं हुआ जा सकता. लाइव इंडिया के प्रकाश सिंह के मामले में हमने देखा कि जब उमा खुराना फर्जी स्टिंग ऑपरेशन के मामले में न केवल चैनल ने उसे बाहर का रास्ता दिखाया( हालांकि ये काम चैनल ने खुद अपना बचाव करने और तत्कालीन संपादक सुधीर चौधरी के पूरे मामले से पल्ला झाड़ लेने का ज्यादा था) बल्कि कानूनी कार्रवाई होने के बाद भी मीडिया इन्डस्ट्री ने उसे दोबारा से अपना लिया औऱ तो और वो नवीन जिंदल का मीडिया सेल तक पहुंच गया. मतलब ये कि जिस पद से प्रकाश सिंह को चैनल से निकाल-बाहर किया गया था, आगे उसकी तरक्की ही होती गई..इसका सीधा मतलब है कि मीडिया इन्डस्ट्री से लेकर राजनीति में ऐसे लोगों को शह दिए जाने, पचाने और पालने-पोसने के पूरे स्कोप होते हैं.. कानूनी प्रावधानों और मीडिया एथिक्स से अलग पूरा मामला इस बात पर आकर टिक जाता है कि वो अपने दम पर कितना रसूख रखता है.

नारायण वरगाही की फिलहाल तो छुट्टी हो गई है लेकिन अगर उसकी नेटवर्किंग भी प्रकाश सिंह की तरह ही होगी तो आप देखेंगे कि किसी दूसरे चैनल या नेता का मीडिया सलाहकार बनकर अभी से कहीं ज्यादा बेहतर स्थिति में है.इसे आप इस तरह से भी समझ सकते हैं कि मीडिया इन्डस्ट्री में एक तरफ तो ऐसे दागदार लोगों को शह देने और पचाने की परंपरा रही है और अगर मीडिया एथिक्स और नियमन से जुड़े संस्थान इन पर उंगलियां उठाने का काम करे तो उल्टे संस्थान ही कटघरे में खड़े कर दिए जाते हैं. इसे आप प्रकाश सिंह से आगे जाकर जी न्यूज के संपादक और बिजनेस हेड सुधीर चौधरी की 100 करोड़ की कथित दलाली और इस संबंध में हुई गिरफ्तारी के संबंध में देख सकते हैं कि कैसे उसने एनबीए को ही घसीटने की कोशिश की और जो मामला एक बड़े संदर्भ से जुड़ा था वो धीरे-धीरे इतना पर्सनल होता चला गया कि सुधीर चौधरी अब पहले की तरह चैनल पर सरोकार का डंका बजाते नजर आ रहे हैं..

मतलब ये कि एकबारगी तो ये दिखाई देता है कि इस तरह के प्रतिरोध का तत्काल असर होता है लेकिन बाद में आगे चलकर फिर वही स्थिति बन जाती है..फिलहाल हम इस बात पर उम्मीद जाहिर कर सकते हैं कि लोगों के वीडियो शेयर किए जाने और स्टेटस अपडेट करने का असर ये है कि एक ऐसे मीडियाकर्मी को चैनल ने अपने से अलग किया जो पत्रकारिता क्या सामान्य जीवन में भी सभ्य व्यवहार का अभ्यस्त नहीं रहा और इनके लिए ये तर्क भी प्रस्तावित नहीं किया जा सकता कि ये चूक भर थी..आप ही बताइए न, किसी इंसान के कंधे पर चढ़कर पीटूसी की जानी चाहिए या नहीं, ये किसी को कौन सी मीडिया क्लास में सीखानी पड़ेगी ?

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2 Response to 'न्यूज एक्सप्रेस के बेहया रिपोर्टर की हो गई छुट्टी'
  1. प्रवीण पाण्डेय
    http://taanabaana.blogspot.com/2013/06/blog-post_26.html?showComment=1372210543905#c6302842898488834558'> 26 जून 2013 को 7:05 am

    संवेदनशीलता तो सीखनी ही होगी..

     

  2. अनूप शुक्ल
    http://taanabaana.blogspot.com/2013/06/blog-post_26.html?showComment=1372217360982#c2961712325611733747'> 26 जून 2013 को 8:59 am

    सोशल मीडिया का यह जलवा है कि चैनल उसकी अनदेखी नहीं कर सकता।

    नारायण वरगाही भी तो इसी दुनिया का उत्पाद है। उसको लगा होगा कि शायद इस तरह कुछ नया करने की श्रेय मिलेगा। अब सिखाने को तो ये भी नहीं सिखाया गया होगा किसी मीडिया क्लास में किसी बाप से , जिसका बेटा हाल ही में किसी हादसे में मरा, से पूछा जाये कि आपको कैसा लग रहा है लेकिन लोग पूछते हैं। थोड़ा चेहरा लटकाकर पूछते हैं। हम तो इंतजार कर रहे थे कि बाढ़ में गले तक धंसे किसी आदमी के मुंह के आगे माइक सटाकर कोई पत्रकार पूछेगा- आपको कैसा लग रहा है पानी में?

    पत्रकार को अपने किये की सजा मिली। आगे किस जुगाड़ से वह कहां लगता है यह बाद में देखा जायेगा। वैसे भी कहा जाता है न - पाप से घृणा करो, पापी से नहीं।

     

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