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कल रामजस कॉलेज की एक लड़की को जैकेट पहने देखा। देखकर बहुत अच्छा लगा । जैकेट पर लिखा था - रामजस कॉलेज , डिपार्टमेन्ट ऑफ़ हिन्दी ।
campus मे अपने कॉलेज और डिपार्टमेन्ट के नाम पर टीशर्ट, गर्म कपडे निकालने का पुराना चलन है। हॉस्टल मे लोग अपने हॉस्टल के नाम पर टीशर्ट निकालते है।
टीशर्ट निकालने के अलग-अलग मतलब हो सकते है। ये मतलब निकालने और खरीदने वाले के लिये अलग-अलग होते है। जो निकलते है उन्हें एक आइटम मे ७५ से १०० रुपये की कमाई हो जाती है और काम भी कोई बेकार का नही है। अगर आपने कोई अलग ढंग का आइटम निकाल दिया तो लोग लंबे समय तक याद रखते है आपको। अपनी पहचान बनने का ये भी एक बेहतर तरीका है। अच्छा इसी बहाने आपका पीआर बनेगा और आप इलेक्शन मे कल्चरल सेक्रेटरी के लिये सोच सकते है। कॉलेज मे लड़कियों से दोस्ती हो सकती है। हिन्दू मे तो एक -दो मेरे फ्र्स्तु दोस्त टीशर्ट लेने अपने कमरे मे बुलाते और शाम मे कमला नगर मे मोमोज़ खिलाते कि मुझे गर्ल-फ्रेंड मिल गयी है, आज पहला दिन था, कमरे मे आयी थी....पार्टी .... । ये तो तब मामला समझ मे आता जब अगले दिन गार्ड से लड़की पूछती जो भैया / सर टीशर्ट निकालते है , उनका कौन सा रूम है और पहुचती। और वापस अपने पैसे मांगती या फिर कहती कि सर साइज़ बड़ा है, छोटे दे दे या फिर इसमे मे तो छेद है, दूसरी पीस दे दे ।
हमलोग सबसे पहले आइटम खरीदते , क्यो यही एक ऐसा आइटम होता जिससे अपनी हैसिअत का पता नही चलता . हम तो चाहते कि कॉलेज के नाम से जीन पैंट भी निकले, जूते भी। कभी-कभी टीशर्ट निकालना पोल्तिक्स की बात हो जाती और वोट के हिसाब से ग्राहक गिनते कि कौन-कौन लेगा।
निकालने वाले अक्सर दबंग या फिर फुरसतिया किस्म के लोग होते है । टीशर्ट निकालने मे हिन्दी के लोग शामिल होते है लेकिन कभी भी हमने हिन्दी डिपार्टमेन्ट के नाम पर कुछ निकालते नही देखा।
ऐसा नही है कि हिन्दी के बच्चो की कॉलेज मे संख्या कम होती है लेकिन कोई हिन्दी टीशर्ट पर प्रिंट कराना ही नही चाहता । हिन्दू मे जब मैंने एक बार बात कि भैया मुक्तिबोध या कबीर की कुछ पंक्तिया लिखकर अपने विभाग का टीशर्ट क्यो नही निकालते । तो बन्दे ने कहा कि यार तुम हमेशा चुतियापा क्यो करते हो , कौन हिन्दी कि टीशर्ट पहनकर घूमेगा । लड़किया पहले खूब अच्छे से बात करती है लेकिन जब पता चलता है कि हिन्दी से है तो कट ने लगती है और हिन्दी कि लड़किया तो पहले से ही सलवार -कमीज़ मे पता चल जाता है कि की है। एक-दो जीन पहनती भी है तो टॉपके साथ इतना कुछ पहनती है कि कही से कांफिदेंस ही नही झलकता। एक जूनिएर ने कहा क्या सर आप हमेशा तैल करने मे लगे रहते है। आरुशी से इंग्लिश मे बात करता हू और वो भी बहुत स्पेस देती है और अब हिन्दी कि टीशर्ट पहनकर घुमूँगा।

आख़िर मैंने एक प्लेन टीशर्ट ख़रीदा और उस पर लिखा-

अब अभिव्यक्ति के ख़तरे उठाने ही होंगे

और पहनकर घूमता । कई लोगो ने पूछा कहा से करवाए और मैंने कहा, खुद से कर लिया।
कल लड़की को हिन्दी लिखा पहने देखा तो सचमुच बहुत अच्छा लगा कि-
चलो लोगो को अब ये बताने मे शर्म नही आती ही वो हिन्दी का स्टूडेंट है...

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2 Response to 'हिन्दी की जैकेट, हिन्दी की टीशर्ट'
  1. राकेश
    http://taanabaana.blogspot.com/2007/12/blog-post_19.html?showComment=1198048740000#c519970628158238484'> 19 दिसंबर 2007 को 12:49 pm

    bahut badhiya. Hindi ko kamzor to na samjho. Par samsya wahan aati hai jab hindi ki thekedari karne lagte hain.

     

  2. Sanjeet Tripathi
    http://taanabaana.blogspot.com/2007/12/blog-post_19.html?showComment=1198049700000#c3799765985733000377'> 19 दिसंबर 2007 को 1:05 pm

    मस्त लिखते हो प्यारे!!

     

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