.

मिलते हैं छोटे से ब्रेक के बाद

Posted On 1:08 am by विनीत कुमार |

अभी से बीस मिनट पहले जब फेसबुक पर स्टेटस लिखा- कुछ दिनों के लिए फेसबुक से विदा लेना चाहता हूं..मिलते हैं बहुत जल्द ही छोटे से ब्रेक के बाद..आगे और भी कुछ-कुछ बातें तो लोगों के कमेंट आने शुरु हो गए. कुछ लोगों ने कमेंट न करके मैसेज बॉक्स में अपना नंबर दिया और कहा- जब भी पटना आना हो, इलाहाबाद आएं तो बताएं..कभी जयपुर की तरफ आइएगा तो बताइएगा, हम आपको मिस करेंगे. ये सारे संदेश पढ़कर अचानक से मेरी आंखों में आंसू आ गए. 

लगा जिस वर्चुअल स्पेस को हिन्दी समाज और खासकर हिन्दी साहित्य के मठाधीश, जीमेल,फेसबुक अकाउंट विहीन साहित्यसेवी पानी पी-पीकर गाली देते हैं, वो कितने अंजान और उथले हैं इस माध्यम से.जिस शख्स से मैं जीवन में एक बार भी नहीं मिला, फेसबुक और ब्लॉग पर सिर्फ वो मेरी टिप्पणियों पढ़ते हैं, उन्हें मेरे इन सबों से कुछ दिनों तक दूर रहने पर अच्छा नहीं लग रहा है और ये कहते हैं कि इंटरनेट की दुनिया एक मनुष्य को दूसरे मनुष्य से अलग करती है. माफ कीजिएगा, मैं उन खुशनसीब लोगों में से नहीं हूं जिसे कि किसी बुआ ने, किसी मौसी ने फोन करके इतने प्यार से कहा हो कि कभी धनबाद आना, कभी गया आना, कभी झुमरी तिलैया आना..

लेकिन ये वर्चुअल स्पेस के मेरे दोस्त कितने प्यार से मुझे बुला रहे हैं. उन्हें दुख हो रहा है कि मैं अपना अकाउंट डीएक्टिवेट करके उनके बीच से थोड़े वक्त के लिए जा रहा हूं. शुरु-शुरु में जब मैं वर्चुअल स्पेस आया था और लोग सिर्फ मेरी पोस्ट और चैट के बिना पर कहते थे- कानपुर आना तो मेरे यहां आना, इलाहाबाद आने पर बताना, अबकी बार कब रांची आइएगा, बिना मिले मत जाइएगा..उनकी ये बातें सुनकर लगा कि बस औपचारिकता भर के लिए या खुश करने के लिए ऐसा कह रहे हैं. लेकिन नहीं,

 मैं जब अविनाश( मोहल्लालाइव) के साथ ब्लॉगर्स मीट में इलाहाबाद गया तो सचमुच लोग मिलते के साथ ही उसी तरह का प्यार दे रहे थे जैसा कि चैट के दौरान आने का आग्रह किया था. रांची में प्रभातजी को जैसे ही पता चला कि मैं आया हुआ हूं, मिलने की जगह तय की और एक घंटे बाद स्कूटी ताने संत जेवियर्स कॉलेज की मेन गेट के सामने मिले. कुरुक्षेत्र में लोगों ने इसी तरह का प्यार दिया. शिमला,देहरादून सब जगह.

 आज से कोई चार साल पहले जुलाई की उमस भरी दुपहरी थी. मैं अपने हॉस्टल ग्वायर हॉल में टीवी के सामने उंघ रहा था. तभी फोन की घंटी बजी- अबे ओए, कहां है तू स्साले..फोन कहां रख दिया था,लग ही नहीं रहा था. मुझे एकबारगी तो गुस्सा आया, कौन ऐसे बात कर रही है ? फिर उधर से आवाज आयी- मनीषा बोल रही हूं चिरकुट, मनीषा पांडे भोपाल से. दिल्ली आयी हुई हूं तो यहीं के नंबर से कॉल किया. आज मिलेगा ? मैंने कहा हां लेकिन बेटे, मेरे साथ दो जगह जाना होगा- एक तो बुकशॉप और दूसरा कि बाजार,मुझे कुछ चीजें खरीदनी है. मनीषा से मेरी चैट भर होती थी और एकाध बार फोन. बाकी ब्लॉग पर टीका-टिप्पणी. वो आयी और वायदे के मुताबिक किताब की दूकान के साथ-साथ लेडिज पर्स,पटरी पर ऐसे ही मोल-तोल. न,न ये लो न..अरे वाह, तू तो बड़ा मस्त शख्स है यार.तेरे साथ तो कोई भी लड़की बिंदास लाइफ बिताएगी..हा हा. चार घंटे की मुलाकात में लगा ही नहीं कि मनीषा से मेरी पहली मुलाकात थी. 

 इसी तरह मुरैना से, पानीपत से, जयपुर से, पटना से, चेन्नई से, जालंधर से देश के न जाने किन-किन हिस्सों से लोग आते और फोन करते- विनीत आपसे मुलाकात हो सकती है. आमतौर पर मेरी बतकही शैली में लिखने के कारण लोगों को उम्मीद रहती है कि ये शख्स भसड़ करने में भी रुचि रखता होगा. खासकर साहित्य की दुनिया से जुड़े लोगों को बहुत आस रहती है कि मंडली जमाई जा सकती है लेकिन मैं निकलता ठीक इसके विपरीत हूं. मुझे लोगों से बहुत मिलना-जुलना पसंद नहीं. जब कि हम इमोशन या शेयरिंग के स्तर पर बहुत अपना और घर जैसा महसूस नहीं कर लेते. अजय ब्रह्मात्मज,रवि रतलामी,अनूप शुक्ल,पीडी,लवली ये सबके सब इसी वर्चुअल स्पेस के तो मेरे अच्छे दोस्त हैं. नाते-रिश्तेदारों से ज्यादा आत्मीय ढंग से बात करनेवाले..इन सबसे नहीं मिला तो क्या हुआ, मेरी दिमागी खुराक तो मिल ही जाती है न. खैर 

मीडिया,समाज,संस्कृति,टीवी,रेडियो..इन सब पर लिखते हुए भी, आलोचना करते हुए भी जीने के स्तर पर मैं वही टीन एजर बना रहना चाहता हूं जिसे कि कोई लड़की हाथ भर छू दे या गलती से छू जाए तो कनपटी गर्म हो जाया करती, पूछने पर नाम बता दे तो मार खुशी से नाचने लग जाए..मेरी लेखन की इस दुनिया में छोटी सी एक ऐसी दुनिया है जहां मैं कभी बड़ा नहीं होना चाहता. ये कुछ-कुछ उस तरह का लोभ है जैसे खरबूजा बेचनेवाला अपने तमाम नफा-नुकसान और ग्राहकों की खुशामदी के बीच भी सबसे उम्दा खरबूजा अपने लिए बचा कर रखता है. मैंने वर्चुअल स्पेस पर लिखते हुए इस दुनिया को सहेजने और विस्तार देने की कोशिश की है. चुन-चुनकर उनलोगों से दोस्ती की है जिनका रात के दो बजे फोन करना असहज नहीं लगता और सुबह सात बजे तक इस कान से उस कान तक मोबाइल इधर-उधर करते कभी जुबान से अब रखो नहीं निकलता. जिसे अपनी पूरी कहानी सामने धर देने पर इस बात का भय नहीं होता कि वो इसके साथ क्या करेगा, पीछे से कौन सी राजनीति करेगा ? यहां तक कि जीमेल पासवर्ड देते हुए भी डर नहीं लगा कि वो इसका बेजा इस्तेमाल करेगा ? ये सब आपको फैंटेसी लगती होगी न,कोरी भावुकता ?

 लेकिन यकीन मानिए, वर्चुअल स्पेस पर मैंने ऐसी जिंदगी जी है..लगता नहीं था कभी कि सचमुच सडांध के बीच इतनी खूबसरत दुनिया भी हो सकती है. थोड़े वक्त के लिए इस वर्चुअल स्पेस से विदा ले रहा हूं. बिना किसी ठोस वजह और किसी तरह के दवाब के. बस ये है कि यहां से जाना मेरी निजी जिंदगी में एक बड़ा खालीपन पैदा करेगा. लेकिन मुझे ये खालीपन चाहिए, मुझे इसकी जरुरत है ताकि मेरे इस खालीपन में मेरे सपने तैर सकें, उम्मीदें बढ़ सके, छोटे से जंगल का विस्तार हो सके और हम पहले से कुछ और ठोस होकर लौंटे. इस बीच किसी भी तरह की जरुरत हो तो मेल कीजिएगा, मैसेज या फोन कीजिएगा. vineetdu@gmail.com. mob- 8826950133
| edit post
8 Response to 'मिलते हैं छोटे से ब्रेक के बाद'
  1. अनूप शुक्ल
    http://taanabaana.blogspot.com/2012/10/blog-post_15.html?showComment=1350263588097#c5749624340865080377'> 15 अक्तूबर 2012 को 6:43 am

    आओ जल्दी से लौटकर!

     

  2. प्रवीण पाण्डेय
    http://taanabaana.blogspot.com/2012/10/blog-post_15.html?showComment=1350273467035#c6700514083964475910'> 15 अक्तूबर 2012 को 9:27 am

    खोदने से गन्दगी भी निकल आती है, कौन इतनी मेहनत करे?

     

  3. Vivek Rastogi
    http://taanabaana.blogspot.com/2012/10/blog-post_15.html?showComment=1350281007424#c354916556251800337'> 15 अक्तूबर 2012 को 11:33 am

    वाकई सोशल नेटवर्किंग कब इतने दिल के करीब हो गई, पता ही नहीं चला ।

     

  4. PD
    http://taanabaana.blogspot.com/2012/10/blog-post_15.html?showComment=1350309738459#c8583154936500794022'> 15 अक्तूबर 2012 को 7:32 pm

    बैठे-ठाले सेंटी कर दिया. :)

     

  5. Vikas Gupta विकास गुप्ता
    http://taanabaana.blogspot.com/2012/10/blog-post_15.html?showComment=1350330413623#c4248777953979539699'> 16 अक्तूबर 2012 को 1:16 am

    वास्तव मे फेसबुक ने लोगो की बीच की दूरियों को मिटा दिया है ।

     

  6. Teenu
    http://taanabaana.blogspot.com/2012/10/blog-post_15.html?showComment=1350647955982#c668146091395834641'> 19 अक्तूबर 2012 को 5:29 pm

    इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

     

  7. Teenu
    http://taanabaana.blogspot.com/2012/10/blog-post_15.html?showComment=1350648626018#c8426261101910039842'> 19 अक्तूबर 2012 को 5:40 pm

    sahi keha aapne ..
    ek break to banata hi hai ..

     

  8. दीपक की बातें
    http://taanabaana.blogspot.com/2012/10/blog-post_15.html?showComment=1350973486243#c8651397750188295300'> 23 अक्तूबर 2012 को 11:54 am

    मैं आपको वाकई मिस कर रहा हूं। खासकर टीवी पर होने वाली तमाम घटनाओं पर आपकी रोचक टिप्पणी की कमी खल रही है। उम्मीद है आप जल्द से जल्द ये वनवास खत्म करके धमाकेदार वापसी करेंगे।

     

एक टिप्पणी भेजें