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दिल्ली में पांच साल की बच्ची के साथ हुई  घटना को लेकर एक बार फिर न्यूज चैनलों पर मेलोड्रामा और टीवी सीरियल की शक्ल में अहर्निश खबरें और पैकेज पेश किए जाने की कवायदें जारी हैं. एक बार फिर भारी मेकअप के बीच एंकरिंग तो छोडिए, फील्ड पीटूसी देने का सिलसिला जारी है. इनमें इंडिया न्यूज जैसे चैनल की आवाज कुछ ज्यादा ही उंची है जिसका संबंध मॉडल जेसिका लाल के हत्यारे से है. वो पूरी दिल्ली को दरिंदा बता रहा है और इसका खात्मा करने पर ही शहर को सुरक्षित होने के विकल्प प्रस्तावित कर रहा है. जाहिर है, ऐसे में ये शहर पुरुषविहीन होगा. लेकिन इन टीवी सीरियल की शक्ल में पेश की जा रही खबरों और पैकेज के बीच का सबसे बड़ा और कड़वा सच है कि नोएडा फिल्म सिटी जो खबरों की मंडी है, वहां भी यही सबकुछ होता है जिसके लिए पूरे देश में चैनल क्रांति की अलख जगाने निकला है. लिहाजा पेश है कुछ फेसबुक अपडेट्स-

1. मैं उस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं जिस दिन हमारे साथियों के हाथ के बैनर,मुर्दाबाद के नारे, हल्लाबोल के नारे सरकारी महकमे,दिल्ली पुलिस कार्यालय से मुड़कर उन चैनलों की ऑफिस के आगे भी बढ़ेगे जहां वो सबकुछ होता है, जो शहर और देश के बाकी हिस्से में होते हैं और उतनी ही बर्बरता से मामले को दबाया जाता है.

2. टीवी सीरियल को वूमेन स्पेस कहा जाता रहा है क्योंकि यहां पुरुष के मुकाबले स्त्री पात्रों की संख्या लगभग दुगुनी है. यही बात आप न्यूज चैनलों के संदर्भ में भी कहा जा सकता है. दुगुनी नहीं भी तो चालीस-साठ का अनुपात तो है ही लेकिन वो इस मीडिया मंडी में सुरक्षित तो छोड़िए इतनी भी आजाद नहीं है कि वो अपने उन इलाकों पर स्टोरी कर सके जहां से देशभर की स्त्रियों की सुरक्षा को लेकर बड़ी-बड़ी बातें हो रही है लेकिन उसके साथ भी यहां वही सबकुछ होता है जो कि इससे बाहर के इलाके में हो रहा है.

3. आप नोएडा फिल्म सिटी में काम करनेवाली मीडियाकर्मियों से पूछिए क्या वो शाम को ऑफिस से निकलती हुई सुरक्षित महसूस करती है, आपको गहरी निराशा होगी. शराब के नशे में धुत्त, चैनल की गाड़ियां मोबाइल बार में तब्दील हो जाती है. जितने भद्दे और घिनौने कमेंट अपने चैल की मीडियाकर्मियों को लेकर होती है, पास से गुजरना किसी यातना से गुजरने जैसा है. ऐसे में जब स्क्रीन पर इन चैनलों के भीतर से बड़ी-बड़ी बातें प्रसारित होते देख रहा हूं तो लग रहा है कितने सारे हिन्दी सिनेमा एख साथ प्रोड्यूस कर रहे हैं ये चैनल..

4. नोएडा फिल्म सिटी न्यूज चैनलों की मंडी है. आपको वहां एकाध को छोड़कर बाकी सब सभी राष्ट्रीय चैनलों की ऑफिस,दर्जनों ओबी और कैब मिल जाएंगे..कायदे से नोएडा फिल्म सिटी से सुरक्षित जगह दिल्ली-एनसीआर में कोई दूसरी नहीं होनी चाहिए..लेकिन

शाम होते ही चैनलों की ये मंडी शराबियों के अड्डे में तब्दील हो जाती है. चैनलों की ऑफिस से जो भी लड़कियां बाहर निकलती है, पूरी तरह चेहरे ढंककर निकलती है ताकि कोई देखकर फब्तियां न कसे, छेड़ने न लग जाए. इधर देश और दुनियाभर की महिलाओं,स्त्रियों की सुरक्षा का दावा करनेवाले,चैनलों का पट्टा लटकाए राष्ट्रीय चैनल के मीडियाकर्मी "मैंने तो कहा एक बार टांग तो खोलो.." जैसी भद्दी टिप्पणियां करते सहज मिल जाएंगे. गाड़ियों पर चैनल के स्टीगर लगे होते हैं और डिक्की खोलकर उसमे सज जाती है गिलासें, बोतलें और आसपास की रेडियों का चखना. अजीब दहशत सा माहौल बन जाता है. अगर आपकी आंखें बंद करके सीधे वहां पहुंचाया जाए तो आप किसी भी हालत में ये नहीं महसूस कर पाएंगे कि ये चैनलों की मंडी है. आपको बमुश्किल महिला मीडियाकर्मी वहां घूमती मिलेगी..
अब जबकि गला फाड़-फाड़कर तमाम चैनल बता रहे हैं कि बलात्कारियों,दरिंदों की ये दिल्ली/एनसीआर है तो कोई नोएडा फिल्म सिटी पर स्टोरी करे, अंदाजा लग जाए कि सामान्य तो छोड़िए, महिला मीडियाकर्मी कितनी सुरक्षित हैं.


5. मॉडल जेसिका लाल की हत्या की सजा काट रहे मनु शर्मा के खानदान का चैनल इंडिया न्यूज अभी स्पेशल स्टोरी चला रहा है- दरिदों की दिल्ली. एंकर दमखम से, वीओ की दैत्याकार आवाज आ रही है- जब तक दरिंदों का खात्मा नहीं होगा, दिल्ली दरिंदों की रहेगी. एक के बाद एक बॉक्स पॉप से ये साबित करने की कोशिश की जा रही है कि इस शहर में सिर्फ दरिंदे, लड़कियों को छेड़नेवाले रहते हैं..लेकिन हत्यारे के चैनल पर ये सब देखना किसी अश्लील फिल्म देखने से कम तकलीफदेह नहीं है.

6. टीवी सीरियल को वूमेन स्पेस कहा जाता रहा है क्योंकि यहां पुरुष के मुकाबले स्त्री पात्रों की संख्या लगभग दुगुनी है. यही बात आप न्यूज चैनलों के संदर्भ में भी कहा जा सकता है. दुगुनी नहीं भी तो चालीस-साठ का अनुपात तो है ही लेकिन वो इस मीडिया मंडी में सुरक्षित तो छोड़िए इतनी भी आजाद नहीं है कि वो अपने उन इलाकों पर स्टोरी कर सके जहां से देशभर की स्त्रियों की सुरक्षा को लेकर बड़ी-बड़ी बातें हो रही है लेकिन उसके साथ भी यहां वही सबकुछ होता है जो कि इससे बाहर के इलाके में हो रहा है.

7. आप में सो जो लोग भी दिल्ली की ताजा घटना को लेकर टीवी टॉक शो में जा रहे हों, चैनल के लोगों से अपील कीजिए कि लड़की के लिए किसी की बेटी,किसी की बहन,किसी की पत्नी जैसे जुमले का इस्तेमाल बंद करने की अपील कीजिए. ये बहुत ही घटिया और घिनौना प्रयोग तो है ही..साथ ही आप नागरिक के बजाय बहन,बेटी,पत्नी को वेवजह क्यों घसीटते हैं..ये सब करनेवाले लोग बहन,बेटी..तक का ख्याल नहीं करते..आप संबंधों को एंटी वायरस की तरह इस्तेमाल न करें.

8. 
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6 Response to 'शाम होते ही मीडिया मंडी बन जाती है शराबी मीडियाकर्मियों की मंडी'
  1. Anil anuj
    http://taanabaana.blogspot.com/2013/04/blog-post_21.html?showComment=1366534186496#c952239447413626799'> 21 अप्रैल 2013 को 2:19 pm

    Mandi hai isliye wahan botlon ke sath-sath bahut kuch sajta hai..

     

  2. akash jain
    http://taanabaana.blogspot.com/2013/04/blog-post_21.html?showComment=1366534821633#c157723891562718519'> 21 अप्रैल 2013 को 2:30 pm

    बहतरीन ब्लॉग

     

  3. nand lal
    http://taanabaana.blogspot.com/2013/04/blog-post_21.html?showComment=1366536862149#c7947852747023234542'> 21 अप्रैल 2013 को 3:04 pm

    इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

     

  4. SUMIT PARASHAR
    http://taanabaana.blogspot.com/2013/04/blog-post_21.html?showComment=1366551382244#c8459108805485294378'> 21 अप्रैल 2013 को 7:06 pm

    News bussiness b baki sab bussiness ki tarah gandagi se bhar chuka h.... soo sad to know all this about news channels

     

  5. vibha rani Shrivastava
    http://taanabaana.blogspot.com/2013/04/blog-post_21.html?showComment=1366883053240#c265619575738925932'> 25 अप्रैल 2013 को 3:14 pm

    salaam aapko .......
    aabhaar aapkaa sachchaai ke liye ...........

     

  6. Mukesh Kumar Sinha
    http://taanabaana.blogspot.com/2013/04/blog-post_21.html?showComment=1366889170378#c8020445928187628912'> 25 अप्रैल 2013 को 4:56 pm

    sachchai ko salam...

     

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